Happy Bohag Bihu 2019: बोहाग बिहू का महत्‍व, अपनों को भेजें ये Messages, Wishes, Images, Quotes


Bohag Bihu 2019 पर्व की शुरूआत हो चुकी है. ये पर्व असम के बड़े पर्वों में से एक है.

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असम में एक साल में तीन बिहु मनाया जाता हैं. बोहाग (बैसाख, अप्रैल के मध्य), माघ (जनवरी के मध्य में) और काटी (कार्तिक, अक्टूबर के मध्य) के महीनों में.

बिहु प्राचीन काल से ही असम में मनाया जा रहा हैं. प्रत्येक बिहु खेती कैलेंडर में एक विशिष्ट चरण के साथ मेल खाता हैं. सबसे महत्वपूर्ण और तीन बिहू उत्सव में सबसे रंगीन हैं वसंत महोत्सव ‘बोहाग बिहू’ या रोंगाली बिहू जो कि अप्रैल के मध्य में मनाया जाता हैं.

यह उत्सव कृषि सीजन की शुरुआत को भी दर्शाता हैं. बिहु असम कि सभी भागो में और सभी जाति-जनजाति और धर्म के लोगो द्वारा मनाया जाता है.

भेजें खास मैसेज-

May your life be as colourful and joyful as the festival of Bihu.
Happy Bohag Bihu


Bihuti ahise, dhul pepa bajise, birikhe holaise paat, nahoror hubakhot ure mon, ulahot bihu bihu lagise gaat bihur hiyabhora subhessa jonalu.
Happy Bohag Bihu!

Let Bihu be your strength for whatever you have to face this year.
Let it be a day to celebrate all the successes and health.
Happy Bohag Bihu

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नई दिल्ली: बिहू असम का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है. असम में इस त्योहार के साथ ही नये साल की शुरुआत मानते हैं. इस दिन सूर्य मेष में गोचर करता है, इसलिए नये सौर कैलेंडर की शुरुआत माना जाता है इसे. इस साल यह 15 अप्रैल को मनाया जाएगा.

बैसाखी की तरह ही बिहू भी किसानों का त्योहार है. किसान अपनी फसलों की कटाई करते हैं और ईश्वर को फसलों के लिए धन्यवाद करते हैं. बिहू पर नये अनाज से ही पकवान तैयार किए जाते हैं और उसे भगवान को चढ़ाया जाता है. इस दिन के बाद ही किसान नया अनाज खाना शुरू कर देते हैं. हालांकि बिहू साल में तीन बार मनाई जाती है. ठीक उसी तरह जैसे किसानों की खेती होती है और साल में तीन बार कटाई होती है. पहला होता है भोगाली बिहू या माघ बिहू, दूसरा होता है बोहाग बिहू या रोंगाली और तीसरा होता है कोंगाली बिहू. बोहाग बिहू अप्रैल के महीने में मनाई जाती है. बैसाखी, विषु और तमिलनाडु के नये साल की तरह.

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महत्व

बोहाग बिहू या रोंगाली के महत्व को फसलों की कटाई से जोड़कर देखा जाता है. इसके साथ ही वसंत की शुरुआत होती है. इस दिन लोग तरह-तरह के पकवान बनाते हैं, गाना गाते हैं और नृत्य करते हैं. इस त्योहार में असम के लोग पारंपरिक पोषाक पहनकर बिहू डांस करते हैं. यह एक दिन का नहीं, बल्कि सात दिनों का त्योहार है और इसके हर दिन का अलग ही महत्व है. त्योहार मनाने के लिए लोग सुबह जल्दी उठते हैं और स्नान कर लेते हैं. नहाने के लिए वह कच्ची हल्दी और उड़द दाल के पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं. नहाकर नये कपड़े पहनते हैं और बड़ों का आर्शीवाद लेते हैं. एक दूसरे को तोहफा देते हैं. इसके बाद वो जलपान करते हैं. जलपान का वहां अर्थ होता है सुबह का नाश्ता. इसमें चावल के साथ दही और गुड़ दिया जाता है.

इसके बाद जो लंच होता है वह थोड़ा भारी होता है. खाने में खार नाम का व्यंजन तैयार किया जाता है. जिसका स्वाद कड़वा होता है. यह कच्चे पपीते से तैयार किया जाता है. इसमें जले हुए केले के तने को मिलाया जाता है. साग, मछली, मटन आदि भी इस त्योहार में लोग जम कर खाते हैं और खिलाते हैं.

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क्या-क्या बनता है बिहू में…

1. खार
असम के लोगों के लिए खास बहुत ही महत्वपूर्ण डिश है. इसमें अल्केलाइन या कहें कि क्षारीय तत्व डाला जाता है और पपीते के साथ-साथ जले हुए केले के तने का इस्तेमाल भी किया जाता है. इससे पेट की सफाई हो जाती है.

2. आलू पितिका
आलू पितिका सबसे आरामदायक डिश में से एक है. बिहार में इसे चोखा कहते हैं. उबले आलू को मसलकर, उसमें प्याज, हरी मिर्च, हरी धनिया पत्तियां, नमक और सरसों तेल डाला जाता है. आमतौर पर इसे चावल दाल और नींबू के साथ सर्व किया जाता है.

3. जाक
जाक या साग में सारी हरी और पत्तेदार सब्जियां होती हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से सेहत ठीक होती है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

4. मसोर टेंगा
असम में लोग मछली खूब खाते हैं. इसमें सबसे ज्यादा मशहूर, प्रचलित और पसंदीदा डिश है, वह है मसोर टेंगा. यह थोड़ा खट्टा होता है. इसमें नींबू, कोकम, टमाटर, हर्ब्स, कोकम आदि डाला जाता है. इसे चावल के साथ खाते हैं.

5. मांगशो
मांगशो मटन करी डिश होता है. असम में यह डिश भी बहुत प्रचलित है. असम में इसे लूची यानी कि पुलाव के साथ खाते हैं. पारंपरिक पकवान के साथ बिहू का आनंद उठाएं.



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