Vegetarians Can Soon Have This Meat. Know How


New Delhi: At a time when there can be a real fight over what meat is there on your plate, this can be music to the ears. According to reports, European restaurants may get the taste of printed meat from next year as Israeli and Spanish firms are working on the technology to produce meat from the 3-D printer. What! Like paper, the meat will now come straight from the printer to your plate? It sounds like that, but the case is not exactly as simple as that. Researches are going on to save the world from the huge Co2 emissions resulted by meat production. The printed meat will be either be based on plant sources or will be grown in a lab — so there will be no harmful effects like cholesterol etc.

According to the website of the startup that has come up with this novel idea, the technology combines propriety 3D meat modelling, food formulations and food printing technology to deliver a new category of complex-matrix meat in a cost-effective and scalable way.

Impossible it may sound, but using this technology meat has been grown for the first time in space. A small biopsy will be required to extract cells from the animal (whose meat you want to recreate). The cells are then placed in a broth of nutrients that will simulate an environment similar to the animal’s body. A thin piece of steak will be grown like this.



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खान-पान में जरूरी विटामिन नहीं ले रहे Indians, उत्‍तर भारत की स्थिति ज्‍यादा खराब


नई दिल्ली: भारतीयों के खान-पान में अनिवार्य विटामिनों की बड़ी अनदेखी देखी गई है. विटामिन ए, सी, बी 12 और फोलिक एसीड में प्रतिशत कमी के हिसाब से सबसे खराब स्थिति उत्तर भारत की है जबकि विटामिन बी 1 की सबसे अधिक कमी दक्षिण भारत में देखी गई. विटामिन बी 2 की सबसे अधिक कमी पश्चिम क्षेत्र के मरीजों में दर्ज की गई. डॉयग्नॉस्टिक चेन एसआरएल डॉयग्नास्टिक्स के साढ़े तीन सालों में 9.5 लाख से अधिक सैम्पल के विश्लेषण से यह निष्कर्ष सामने आया है. महिला एवं पुरुष आधारित विस्तृत विश्लेषण में देखा गया कि विटामिन ए, बी 2 और बी 6 की कमी महिलाओं में अधिक है जबकि पुरुषों में विटामिन सी एवं बी 12 की अधिक कमी है.

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तेजी से शहरीकरण और साथ ही, जीवनशैली में आए बदलाव और खान-पान की गलत आदतों की वजह से स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण मानकों पर भारतीयों के पोषण में बड़ी कमियां पाई गई हैं. एसआरएल के डाटा के इस विश्लेषण ने स्पष्ट कर दिया है कि विटामिन ए, सी, बी 1, बी 6, बी 12 और फोलेट में जिस प्रकार की कमी है उससे लंबे समय में कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. एसआरएल के विश्लेषण से यह सामने आया है कि विटामिन की कमी देश के अन्य हिस्सों की तुलना में सबसे अधिक उत्तर भारतीय आबादी में है. यह डाटा 2015 और 2018 के बीच पूरे भारत के 29 राज्यों और संघीय प्रदेशों के एसआरएल लैब्स में 9.5 लाख से अधिक सैम्पल की जांच पर आधारित है.

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दैनिक आहार में पोषक फल और सब्जियां नहीं होने से बिगड़ रहे हालात
एसआरएल डॉयग्नॉस्टिक में शोध-विकास एवं मोलेक्युलर पैथलॉजी के सलाहकार और मेंटर डॉ. बी आर दास ने बताया कि हर वर्ग के लोगों में जांच के परिणामों में असामान्यता पर ध्यान देने से यह सामने आया कि भारत के चारों क्षेत्रों में विटामिन सी, बी 1, बी 2, बी 12 और फोलिक एसीड की कमी की अधिक समस्या 31 से 45 वर्ष के लोगों में है. संभव है कि इसकी बड़ी वजह सफर करते हुए कुछ खा लेना या स्नैक्स में फास्ट फूड लेना है और दैनिक आहार में पोषक फल और सब्जियां नहीं होने से स्थिति और बिगड़ जाती है.

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New Year 2019: नए साल पर क्‍या खाना रहेगा लकी, जानें दुनिया भर के बेस्‍ट Food Traditions


नई दिल्‍ली: नए साल का जश्न मनाने के लिए चारों ओर तैयारियां चल रही हैं. कुछ लोग पार्टी में धमाल मचाने की प्‍लानिंग कर रहे हैं तो कुछ अलग तरीके से इसे एंजॉय करने की फिराक में हैं. ये तो हो गई हमारे देश की बात. ऐसे में क्‍या आप दुनिया भर में नए साल के जश्‍न के तरीकों से रूबरू हैं. उम्‍मीद है नहीं. क्‍योंकि पूरी दुनिया में नए साल से जुड़ी कुछ ऐसी परंपराएं हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. कुछ ऐसे भी देश हैं जहां नए साल की शुरूआत अजीबोगरीब टोटकों के साथ होती है, तो कुछ में अजीबोगरीब खाने से.

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नए साल का जश्न मनाने के लिए चारों ओर तैयारियां चल रही हैं. ऐसे में हम बताते हैं दुनिया भर के कुछ पारंपरिक खाने के बारे में जिन्‍हें नए साल पर खाना लकी माना जाता है:-

1. अंगूर (Grapes)


स्पेनिश और पुर्तगाली मान्यताओं के अनुसार, नए साल के आगमन से पहले आधी रात के समय 12 अंगूर खाना शुभ होता है. ये लोग अंगूर खाते हुए विश मांगते हैं. स्पेन में इस ट्रेडिशन की शुरूआत 1895 में हुई. वहां होने वाली अंगूरों की ज्यादा पैदावार की वजह से लोगों को लगा कि इसे खाकर यहां अंगूरों की खपत बढ़ा सकते हैं. मैक्सिकन भी इसी परंपरा का पालन करते हैं, इस विश्वास के साथ कि जिस महीने का अंगूर खट्टा प्रतीक होता है, वह एक बुरा महीना होने जा रहा है और कुछ ऐसा है जिसकी उन्हें तलाश करनी चाहिए और योजना बनानी चाहिए.

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2. सुअर (Pig)

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जर्मन कल्चर में पिग को खुशहाली व धन-दौलत का प्रतीक चिह्न मानते हैं, साथ ही वहां के लोग नए साल पर सूअर का मीट खाना पंसद करते हैं, जिसे हैम, पोर्क, सॉसेज, बेकन के रूप में पुकारते हैं. विश्व में सबसे ज्यादा मांसाहारी लोग निवास करते हैं. कई लोग मांस को केवल स्वाद के लिए खाते हैं. कई लोग अपने शरीर की ताकत को बढ़ाने के लिए मांस खाते हैं. मान्‍यता है कि नए साल पर सुअर का सेवन यह सुनिश्चित करता है कि नए साल आपके लिए भाग्‍यशाली होने वाला है.

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3. अनार (Pomegranate)

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नए साल पर ग्रीक में फर्श पर एक अनार तोड़कर उसके बीज को गिनने की परंपरा है. ये बीज उनके लिए भाग्य का प्रतीक हैं, और उनका मानना है कि जितना अधिक बीज स्मोक्ड फल है, उतना ही नया साल भाग्य लाएगा. एक और जिसे नए साल की पूर्व संध्या पर खाया जाना शुभ माना जाता है वह है अमीर और सुस्वाद अंजीर, जो प्रजनन के लिए एक प्रतीक भी है.

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4. पूरी मछली (Whole Fish)

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मछली में तराजू होते हैं, जो कुछ संस्कृतियों में सिक्कों या पैसे के लिए प्रतीक हैं! नए साल पर पूरी मछली खाना आने वाले साल में आपके घर में धन का एक अग्रदूत माना जाता है. माना जाता है कि मछलियां हमेशा आगे की ओर तैरते हैं, ऐसे में आपकी तरक्‍की भी उसी हिसाब से होती है.

5. हरी सब्जियां (Green Vegetables)

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पालक, केल जैसी हरी सब्जियों को नए साल की पूर्व संध्या पर भाग्यशाली माना जाता है, क्योंकि बहुत सारे देशों में, यह उनकी मुद्रा का रंग है. इसके अलावा, इनका प्रयोग करने से लोग स्वस्थ भी होते हैं, से पौष्टिक भी होते हैं और कुछ महीनों में आप सेहतमंद बन जाते हैं.

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6. काली आंखों वाला मटर (Black Eyed Peas)

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दक्षिण अमेरिका में, काली आंखों वाले मटर और चावल से बने पकवान को भाग्यशाली माना जाता है, क्योंकि मटर (अधिक पैसा!) से मिलता जुलता है. डिश को होपिन जॉन या कैरोलिना मटर और चावल कहा जाता है.

 

7. दाल (Lentils)

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हिंदू नववर्ष के उत्सव के दौरान दाल दक्षिण भारतीय नववर्ष की परंपराओं का एक हिस्सा है, और आमतौर पर चावल के साथ खाया जाता है, जो आमतौर पर बसंत ऋतु में आता है. यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि दाल को उन्‍नति का प्रतीक माना गया है इटली और ब्राजील में दाल को पैसे की तरह भाग्‍यशाली मानते हैं और साल के अंतिम दिन इसका सेवन जरूर किया जाता है.

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8. एक सिक्के के साथ केक ( Cake with a coin)

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ग्रीकवासी ब्रेड या केक बनाने के आटे में एक सिक्का रख देते हैं. फिर इसे बेक कर लिया जाता है. बेक करने के बाद ब्रेड के सिक्के वाला हिस्सा जिसे मिलता है, वह लकी माना जाता है. यह परंपरा संत बेसिल के सम्मान में मनाई जाती है. संत बेसिल ने सबसे पहले सिक्के को बेक करने की शुरूआत की थी.

9. अंगूठी के आकार का भोजन (Ring-shaped food)

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नए साल की पूर्व संध्या पर या नए साल के पहले नाश्ते के लिए प्याज के छल्ले, डोनट्स, या रिंग केक जैसे भोजन के आकार का भोजन करना भाग्यशाली माना जाता है, क्योंकि यह जीवन को पूर्ण चक्र में आने का प्रतीक है.

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ALERT: स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरनाक है ऐसे फल और सब्जियों का सेवन



नई दिल्ली: खेती में एवं खाद्य पदार्थो से संबंधित उद्योगों द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए विशेषज्ञ किसानों को फसलों पर ऐसी दवाओं का छिड़काव करने से बचने की सलाह देते हैं. हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल ने किसानों से कोलिस्टिन एंटीबायोटिक को ना कहने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित भोजन खाने से प्रतिरोधी बैक्टीरिया मानव आंत पर आक्रमण कर सकते हैं. यह आगे चल कर संक्रमण के मामले में होस्ट को एंटीबायोटिक कोलिस्टिन के लिए प्रतिरोधी बना देगा.

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डॉ. के के अग्रवाल बताते हैं कि बैक्टीरिया में कुछ रक्षा प्रणालियां हैं जो धीरे-धीरे एंटीबायोटिक्स के प्रभावों से उन्हें बचाती हैं और वे प्रतिरोधी बन जाती हैं. उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक्स के अधिक उपयोग से रक्षा प्रणाली की यह गति बहुत तेज हो सकती है क्योंकि हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते हैं. उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा कि हाल ही में, चेन्नई से लिए गए कच्चे खाद्य पदार्थो के नमूनों में कोलिस्टिन-प्रतिरोधी बैक्टीरिया मिला है, जो एक वैश्विक ट्रेंड के अनुरूप है. एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया न सिर्फ मीट में, बल्कि हर तरह के भोजन में छिपे होते हैं. टमाटर से लेकर सेब तक सबमें यह शामिल है. अध्ययन में परीक्षण किए गए नमूनों में से करीब 46.4 प्रतिशत में अत्यधिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया पाए गए.

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एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर नजर रखने की जरूरत
उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के ओवर-द-काउंटर उपयोग ने काबार्पेम्स और कोलीन जैसी मूल्यवान दवाओं की प्रभावकारिता घटा दी है. हम तेजी से जीवन रक्षक विकल्पों से बाहर हो चले हैं, क्योंकि वर्तमान में चिकित्सा समुदाय सरल संक्रमण के उपचार से लेकर जटिल शल्यचिकित्सा प्रक्रियाओं तक एंटीबायोटिक दवाओं पर बहुत अधिक निर्भर करता है. डॉक्टरों को अनावश्यक नुस्खों को समाप्त करने की आवश्यकता है, और रोगियों को स्वयं एंटीबायोटिक दवाओं के ओवर-द-काउंटर उपयोग को कम करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन और खेती में एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर नजर रखने की जरूरत है.

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Study Finds Eating a Late Breakfast And an Early Dinner Doubles Fat Loss



A new study has found that changing the time you eat your meals could be the key to reducing body fat.

The University of Surrey conducted the 10-week study on “time-restricted feeding” and found that there was a significant impact on body composition based on the timing of the meals.

During the research, participants did not have to follow a particular diet and could eat whatever they wanted as long as it was within a specific time frame.

The participants were split into two groups. The first group consisted of those who ate their meals as they normally would, while the second group was required to eat their breakfast 90 minutes later and their dinner 90 minutes earlier than normal.

Each participant also had to maintain a diary on their diet throughout the experiment and complete a questionnaire afterwards. They were also required to provide blood samples beforehand.

At the end of the study, it was found that those who ate within a specific time lost more than twice their body fat as compared to those who consumed their meals at normal timings.

Studying their questionnaires, it was found that 57 per cent of those who participated noticed a reduction in their food intake due to the restrictive time period in which they were allowed to eat.

However, more than half of the participants in the fasting group said they would not be able to maintain their restrictive eating window due to it being incompatible with their family and social lives.

“Although this study is small, it has provided us with invaluable insight into how slight alterations to our meal times can have benefits to our bodies,” The Independent quoted lead author Dr Jonathan Johnston, reader in chronobiology and integrative physiology at the University of Surrey, as explaining.

“Reduction in body fat lessens our chances of developing obesity and related diseases, so is vital in improving our overall health. However, as we have seen with these participants, fasting diets are difficult to follow and may not always be compatible with family and social life. We therefore need to make sure they are flexible and conducive to real life, as the potential benefits of such diets are clear to see.

“We are now going to use these preliminary findings to design larger, more comprehensive studies of time-restricted feeding,” he added.



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चावल खाने से नहीं आती है नींद, पूरे दिन तरो-ताजा रहेंगे आप, जानिए Myth और Truth


चावल खाने से आपका वजन बढ़ता है. चावल खाने से नींद आती है. चावल खाने से आप मोटे हो सकते हैं…! चावल खाने को लेकर ऐसी न जाने कितनी बातें या कह लें Myth आपने सुनी होंगी, लेकिन इनमें से एक भी सही (Truth) नहीं है. जी हां, याद करिए दादी-नानी के जमाने की, जब आप चावल-दाल खाकर स्कूल, कॉलेज या अपने दफ्तर के लिए निकलते थे. क्या कभी आपको स्कूल में नींद आई है? बिल्कुल नहीं. और सच भी यही है, क्योंकि चावल जैसा पौष्टिक भोजन और दूसरा कोई है ही नहीं. चावल खाना दरअसल हमारे खाने को पूरा करता है. मतलब यह कि अगर आपके दिन के भोजन में चावल शामिल है तो आप पूरा खाना खा रहे हैं. क्योंकि चावल खाने से न सिर्फ पेट की भूख पूरी होती है, बल्कि इससे मानसिक संतुष्टि भी मिलती है. इसलिए आज से ही अपने रेगुलर खाने में चावल को शामिल करिए और जिंदगी के पूरे मजे लीजिए.

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अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार चावल को ‘Free Food’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें सोडियम, कोलेस्ट्रॉल या ग्लूटेन जैसे तत्व नहीं होते हैं. इन तत्वों को हमारे शरीर के लिए हानिकारक माना जाता है. अलबत्ता चावल में 15 प्रकार के विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जिनमें फोलिक एसिड, विटामिन B, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक शामिल है. अगर आप चावल का सेवन नहीं करते हैं, तो इन 15 गुणकारी तत्वों से वंचित रह जाते हैं. शरीर के संपूर्ण पोषण के लिए जरूरी है कि चावल के साथ दाल और हरी सब्जी के सेवन किया जाए. इससे हमें शरीर को लाभ पहुंचाने वाले विभिन्न तत्व एक साथ मिल जाते हैं.



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चावल के बारे में Myth और Truth
Myth – चावल में काफी अधिक कैलोरी होती है जिससे मोटापा बढ़ता है.
Truth – चावल में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी नहीं होती, बल्कि यह आपके खाने को संपूर्ण बनाता है और आपके कैलोरी सेवन को सीमित करता है.

Myth – चावल खाने से नींद आती है.
Truth – सिर्फ चावल खाने से नींद आती हो, यह वैज्ञानिक तथ्य नहीं है. बल्कि प्रचुर मात्रा में भोजन करने से नींद आती है. अगर आप चावल के बजाए कोई दूसरा खाना भी खाते हैं, तो आपके शरीर में मौजूद हार्मोन पाचन क्रिया के दौरान उसे खून में बदल देते हैं. इससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और मस्तिष्क को मिलने वाले ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आने लगती है, जिससे नींद आती है.

Myth – चावल को तब तक धोना चाहिए जब तक कि पानी साफ न दिखने लगे.
Truth – चावल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोना या साफ करना चाहिए, न कि पानी का रंग साफ होने तक धोना जरूरी है. ज्यादा देर तक धोने से चावल में मौजूद विटामिन की मात्रा में कमी आ जाती है.

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Myth – चावल पकाने से पहले उसे पानी में भिगोकर रखना चाहिए.
Truth – इस मिथक को भी कई लोग मानते हैं कि चावल को पकाने से पहले उसे पानी में कुछ देर तक भिगोना चाहिए. जबकि हकीकत यह है कि चावल को पकाने से पहले अगर आप भिगोकर रखते हैं, तो फिर चावल को उसी पानी में पकाना भी चाहिए. इससे चावल में मौजूद सभी पोषक तत्व पानी में बचे रहते हैं जो शरीर के लिए लाभदायक है.

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कहीं आपकी थाली में भी तो नहीं प्‍लास्टिक वाला चावल? ऐसे करें घर बैठे जांच…


नई दिल्‍ली: मिलावटी आटे के बाद प्‍लास्टिक वाले चावल मार्केट में आ गए हैं. आपको याद ही होगा कि कुछ समय पहले तेलंगाना में दुकानों पर प्‍लास्टिक चावल बिकने की खबरें आई थीं. कुछ दिन पहले उत्‍तराखंड से आई. बड़ी बात नहीं होगी अगर प्‍लास्टिक वाला ये चावल आपकी थाली तक भी पहुंच गया हो.

प्‍लास्टिक चावल के साथ सबसे बड़ी दिक्‍कत ये है कि इसे अलग से पहचानना तभी संभव है जब ये अलग बिक रहा हो. अगर साधारण चावल में इसे मिलाकर बेचा जा रहा हो, तो इसकी पहचान करना मुश्किल है. क्‍योंकि कौन सा दाना नकली होगा, इसे आंख से देखकर आप अंदाजा नहीं लगा सकते.

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बहरहाल, प्‍लास्टिक चावलों की इन तरीकों से जांच की जा सकती है-

– तेल गर्म करें. उसमें थोड़ा चावल डालें. अगर चावल प्‍लास्टिक का होगा तो वो गर्म तेल में चिपक जाएगा.

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– थोड़ा चावल लें. उसे कागज पर रखकर जला दें. अगर जलने जैसी बदबू आने लगे तो वो चावल नकली है.
– चावल को पानी में डाल दें. उसे हाथ से चला दें. अगर चावल ऊपर आ जाएगा तो वो नकली है.

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– अगर इनसे भी आपका शक दूर ना हो तो एक काम करें. चावल बना लें. उसे एक बोतल में डालकर बंदर कर रख दें. दो से तीन दिन के लिए बंद रहने दें. अगर चावल पर फंफूद आ जाए तो वो असली है. अगर फंफूद ना आए तो वो नकली है क्‍योंकि प्‍लास्टिक चावल पर फंफूद नहीं आती.

क्‍या होता है इस चावल का असर
प्लास्टिक के जरिए जब हानिकारक केमिकल्स हमारे शरीर में पहुंचते हैं तो कई बीमारियां होती हैं. इससे पेट खराब हो सकता है, आंत डैमेज हो सकती है. इसके अलावा अल्सर का खतरा होता है. लीवर डैमेज होने का खतरा रहता है. कैंसर का खतरा बढ़ता है.

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Report Says Majority Of Indians Mix Fats, Sugars In Their Diet



One of the first rules of nutrition is to never mix fats and sugars because this contributes to obesity. However, 70 per cent of Indian mix both in their diet, says a report by The Food Analysts. A study conducted by WhatsApp-based nutrition service concluded that up to 70 per cent of Indians mix fats and sugars, regularly as part of their diet. This ever increasing trend has been largely brought about by the growing consumption of fast food items like burgers with cold drinks and pizzas, although processed and heavily refined foods are just as culpable.

The reason for which combinations of fats and sugars are so incredibly unhealthy is the fact that these two compounds are seldom found together in nature, said a statement.

Intramuscular fat is difficult to get rid of because of its hidden nature as it is spread within the muscles of your body. It contributes to insulin resistance, a key cause of Type 2 Diabetes. Increased inflammation, reduced recovery from training, and decreased strength are all side effects of a regular diet of this type, as is hyperphagia -the endearing desire to eat more food.

Studies have also revealed the correlation between the hyperphagic and weight-promoting effects of a sugar-fat diet when compared to a diet that comprises either fats or sugars individually. It’s worth noting that this does not apply to low GI carbs (which are complex in nature) when combined with fats. Low GI carbs do not cause a spike in blood sugar, unlike High GI carbs which are simple in nature. The latter cause a sudden spike of sugar in the blood and thus releasing insulin in a disorganized pattern which creates an environment that deposits fats.

Reflecting on the content of his Company’s report, Veer Ramlugon, Founder and CEO of The Food Analysts said: “While many who’ve read our report are resigned to the idea that India’s incidences of lifestyle diseases will only increase given the growing economy and rising wages, I’m very optimistic.”

“The problems we see today, while serious, are not insurmountable and educating people about the very basics of nutrition will be a significant tool in fighting unhealthy eating habits, particularly fat-sugar combinations.

“I see this issue as one brought about by a lack of awareness about the basics of nutrition that needs to be addressed…If we’re to win the battle against unhealthy eating habits in our country, we first need to know that we’re in a fight to begin with,” added Ramlugon.

Inputs from IANS



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दूध पीने में आनाकानी करता है बच्‍चा, ये 5 ट्रिक्‍स अपनाकर तो देखें…


नई दिल्‍ली: अक्‍सर बच्‍चे दूध पीने में आनाकानी करते हैं. दूध का नाम सुनकर ही मुंह सिकोड़ने लगते हैं. अगर आपका बच्‍चा भी ऐसा करता है तो अब आपको ट्रिकी होना होगा.

चूंकि बढ़ते बच्‍चों के लिए दूध बहुत जरूरी है. कैल्शियम और अन्‍य पोषक तत्‍वों से भरपूर दूध किस तरह बच्‍चे को पिलाया जाए ये ज्‍यादातर मांओं की परेशानी होती है. इसलिए अब आपको कुछ अलग सोचना होगा. यानी कुछ ऐसा करना होगा कि आपको डांटने की जरूरत भी ना पड़े और बच्‍चा खुशी-खुशी दूध का ग्‍लास साफ कर जाए.

आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही टिप्‍स, जिनसे बच्‍चा पूरा दूध पी जाएगा-

– यूट्यूब पर कई वीडियोज हैं. या किसी रेसिपी साइट पर जाकर फ्लेवर मिल्‍क की रेसिपी देखें. सीखें और उसे बनाएं. आप चॉकलेट, स्ट्राबेरी, बटरस्कॉच, वैनिला बना सकते हैं. चाहें तो इलायची, अखरोट, मिंट, हल्दी या शहद डालकर फ्लेवर तैयार करें.
– मिल्कशेक बनाएं. दूध में सीजनल फल जैसे आम डालें. मैंगो शेक या बनाना शेक. ये बच्‍चों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं.
– रंगीन आइस क्यूब्स डालें. गर्मियों के इस मौसम में बच्चों को दूध की तरफ आकर्षित करने के लिए आइस क्‍यूब्‍स काफी काम आते हैं. फूड कलर का यूज भी कर सकती है. कलर यूज नहीं करना चाहते तो कलरफुल स्‍ट्रा दीजिए उन्‍हें.

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– मेवे डालकर उसे गर्म करें. उसका फ्लेवर ही चेंज हो जाएगा.
– फलों के छोटे-छोटे टुकड़े दूध में मिलाएं और दीजिए बच्चों को. ये प्रोटीन, फाइबर, एंटी-ऑक्सिडेंट, इसेंशियल मिनरल और फैटी एसिड्स से भरपूर होते हैं.



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पति-पत्‍नी के बीच दूरियां मिटा देता है सी-फूड, वैज्ञ‍ानिकों ने गिनाए चौंकाने वाले फायदे…


न्यूयॉर्क: अगर आपको लगता है कि आपकी शादीशुदा जीवन में वो बात नहीं रही, तो आपको सी-फूड ट्राई करना चाहिए. एक लेटेस्‍ट शोध में वैज्ञानिकों ने इसके फायदे गिनाए हैं.

यही नहीं, बच्‍चे की चाह रखने वाले दंपत्तियों को भी ये खाना चाहिए. शोध में दंपत्तियों को दैनिक भोजन में समुद्री खाने को शामिल करने की सलाह दी गई है. शोध में खुलासा हुआ है कि समुद्री भोजन का सेवन करने वाले लोग सेक्सुअली रूप से अधिक सक्रिय होते हैं और महिलाएं जल्द गर्भधारण करती हैं.

जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार, ‘शोध में शामिल जोड़ों में से सप्ताह में दो बार समुद्री भोजन करने वाले 92 फीसदी जोड़ों की महिलाएं इससे कम समुद्री भोजन करने वाले 79 फीसदी जोड़ों की महिलाओं की तुलना में साल के खत्म होने तक गर्भवती हो गईं’.

बॉस्टन में हार्वार्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में शोध के सह लेखक औड्रे गैस्किंस ने कहा, ‘हमारे शोध में निष्कर्ष निकाला गया है कि समुद्री भोजन से
कम समय में गर्भवती होने तथा ‘सैक्सुअल’ रूप से सक्रिय होने के अलावा प्रजनन संबंधी कई लाभ हैं’.

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उन्होंने बताया कि ऐसे जोड़े जो बच्चे पैदा करने की योजना बनाने वाले हैं या बना रहे हैं, यदि वे सप्ताह में दो बार समुद्री भोजन करते हैं तो उनमें सैक्सुअल सक्रियता ज्यादा देखी गई और महिलाएं कम समय में ही गर्भवती हो गईं’.
(एजेंसी से इनपुट)



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