हरी मटर से स्लिम होती है बॉडी, मिलती है एनर्जी, नहीं होती जोश की कमी


हरी मटर (Green Peas) सर्दियों के मौसम में खूब आती है. ज्‍यादातर लोगों की ये पसंदीदा सब्जी है लेकिन वे इसके फायदों से अनजान होते हैं.

इसमें कई तरह के स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं. जानें इनके बारे में-

– मटर में काफी फाइबर होता है. नाश्ते में इसे खाने से बॉडी को भरपूर फाइबर मिलता है, जिससे दिनभर के लिए पर्याप्त एनर्जी मिलती है. इसे लगातार खाना वजन कम करने में भी सहायक है.

– हरी मटर में विटमिन K भरपूर मात्रा में होता है. ये हड्डियों को मजबूती देता है. इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को भी कम करता है.

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– हरी मटर कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करती है. साथ ही ये शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ने नहीं देती.

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– मटर की फली में लोहा, जिंक, कॉपर की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद करती है. इसमें ऐंटिऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को
बढ़ाते हैं.

– मटर में विटमिन बी 6, बी 12 और फॉलिक ऐसिड होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है. इससे ऑक्‍सीजन की मात्रा सिर तक पहुंच पाती है और बालों के बढ़ने की गति बढ़ती है. बालों का झड़ना कम होता है.

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Tips: ठंड बढ़ने पर ऐसे करें अपने स्वास्थ्य की देखभाल, दूर रहेगी हर बीमारी



Health Tips: बीते कुछ दिनों से सर्दी अचानक बढ़ गई है. सर्दियों में हर किसी के लिए अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है. क्योंकि सर्दी में थोड़ी सी लापरवाही आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसे में कुछ खास सावधानियां बरतकर और चिकित्सक की सलाह पर अमल कर ही तंदुरुस्त रहा जा सकता है.

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सर्दियों में स्वास्थ्य की देखभाल के लिए डाक्टरों ने कुछ टिप्ट्स सुझाए हैं. जो कि इस प्रकार हैं:-
1. अपने ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें
इस समय नमक का सेवन कम मात्रा में करें, क्योंकि ज्यादा नमक से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है.
2. खाने-पीने की आदतें
साबुत अनाज, दलिया आदि दिल की सेहत के लिए अच्छे हैं और वजन कम करने में भी मदद करते हैं. तले हुए तथा सैचुरेटेड खाद्य पदार्थो का सेवन न करें. फलों और सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करें. इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स इस मौसम में बीमारियों से लड़ने के लिए बहुत फायदेमंद हैं.
3. पानी पीने की आदत
सर्दियों में पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में करें. हर्बल-टी पीने से एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम होता है.
4. अपने वजन पर नियंत्रण रखें
फिट रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें. सैर करें, यह अच्छा व्यायाम है. साथ ही चलने से शरीर में गर्मी आती है. दिन में 6-8 घंटे की नींद लें. रोज कम से कम 15 मिनट चलें, इससे खून का दौरा बढ़ता है.
5. दिल की बीमारियों से बचने के लिए धूम्रपान और शराब का सेवन न करें.
6. अपने आपको गर्म कपड़ों से कवर करके रखें, खासतौर पर पैर, सिर और कानों को ढक कर रखें.

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Health Tips: पुरुष यूं कर सकते हैं अपने बालों की देखभाल, अपनाएं ये नौ उपाय



नई दिल्ली: केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी उनके लुक को बेहतर बनाने में बालों की भूमिका अहम है. अगर पुरुष अपनी दाढ़ी और मूंछ का ख्याल अच्छे से रख सकते हैं तो ऐसे में बालों को अनदेखा करना उचित नहीं है. लॉरियल पेरिस और दिल्ली में स्थित लुकुलन स्टूडियोज की ओर से ऐसे ही कुछ खास टिप्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बालों को स्वस्थ रख सकते हैं.

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ये नौ उपाय अपनाएं
1. पुरुषों के लिए अधिकतर मार्केट में जिस तरह के उत्पादों को लॉन्च किया जाता है, उनमें 2 इन वन या थ्री इन वन इस तरह की विशेषताएं होती हैं. ऐसे में एक ही साथ शैम्पू, कंडीशनर या बॉडी वॉश के रूप में काम आने वाले किसी ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल आपको बेहतर लग सकता है, लेकिन कोशिश हमेशा एक कम्प्लीट हेयर केयर सिस्टम में निवेश करने की करें. हर एक चीज के लिए अलग-अलग उत्पादों का ही इस्तेमाल करें. इनका चुनाव अपने हेयर टाइप के मुताबिक करें.
2. बालों को सुखाते समय उन्हें तौलिए से न घिसें, इससे बाल कमजोर हो जाते हैं और आसानी से टूटने या झड़ने लगते हैं, तो इस समस्या से बचने के लिए उन्हें हल्के हाथों से धीरे-धीरे सुखाएं.
3. हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कम से कम मात्रा में करें.

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4. भले ही पुरुष हेयर कर्लिग या फ्लैट आयरन का इस्तेमाल न करते हों, लेकिन बालों को सुखाने के लिए पुरुष अकसर ब्लो-ड्रायर का उपयोग अकसर करते हैं. ऐसे में जितना संभव हो सके, इससे दूरी बनाकर रखें और अगर करते भी हैं तो हीट प्रोटेक्टेंट का इस्तेमाल जरूर करें.
5. अनचाहे दोमुंहे बालों से छुटकारा पाने के लिए समय-समय पर ट्रिमिंग कराते रहे.
6. बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए डायट का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. विटामिन बी6, बी12 और फॉलिक एसिड बालों के लिए बहुत जरूरी है. केले और आलू जैसे स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थो में विटामिन बी6 की भरपूर मात्रा होती है. बी12 के लिए मीट, मछली और दुग्ध उत्पादों का सेवन किया जा सकता है. फॉलिक एसिड के लिए ताजे फल और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें, खासकर इसके लिए टमाटर या सिट्रिक या खट्टे फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें. प्रोटीन बालों के लिए बहुत जरूरी हैं, ऐसे में दाल और बीन्स को अपने दैनिक आहार में जोड़ें, हालांकि कई बार इन सारी चीजों का पर्याप्त मात्रा में सेवन संभव नहीं हो पाता है तो ऐस में रोज एक मल्टीविटामिन जरूर लें.
9. बालों और जड़ों के लिए तेल बहुत महत्वपूर्ण है. गर्मियों में नारियल तेल और सर्दियों में जैतून या बादाम के तेल से सिर में हल्के हाथों से मालिश करें. बेहतर परिणाम के लिए तेल में थोड़ा सा प्याज का रस मिला लें और फिर उसे बालों में लगाएं, इससे बाल काफी लंबे समय तक अच्छे बने रहते हैं.

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Tips: अगर खर्राटों से हैं परेशान तो सोते समय करें ये काम, मिलेगा फौरन आराम



लंदन: शोधकर्ताओं ने पाया है कि रात के समय चेहरे पर मास्क लगाना उन लोगों के ऊर्जा स्तर और जीवन शक्ति में सुधार कर सकता है, जो स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं. स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें रात को सोते समय सांस लेने में तकलीफ और खर्राटे आने की शिकायत रहती है. फेस मास्क को सीपीएपी मशीन भी कहा जाता है. यह वर्तमान में केवल उन लोगों के लिए ही अनुशंसित है, जिनकी स्लीप एपनिया मध्यम स्तर से गंभीर हो चुकी है.

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अध्ययन द लांसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसके लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के 11 राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) स्लीप सेंटर से 200 से अधिक रोगियों को शामिल किया. उन्होंने स्लीप एपनिया से जुड़े मध्यम मामलों में उपचार के विभिन्न पहलुओं की जांच की. अध्ययन के मुख्य लेखक मैरी मोरेल ने कहा, “हम स्लीप एपनिया और इसके रोगियों के बढ़ते मामलों को देख रहे हैं. पहले हालांकि यह मुख्य रूप से अधिक वजन वाले पुरुषों को प्रभावित करता रहा है. अब हम जानते हैं कि इसका असर रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं, बुजुर्गो और यहां तक कि बच्चों पर भी होता है.

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विश्व के एक अरब से अधिक युवा स्लीप एपनिया के शिकार
मोरेल ने कहा कि स्लीप एपनिया के सभी मामलों में लगभग 60 फीसदी मामलों को हल्के के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन अब तक हमें नहीं पता था कि सीपीएपी इन रोगियों के लिए मददगार होगा या नहीं. स्लीप एपनिया विश्व स्तर पर एक अरब से अधिक वयस्कों को प्रभावित करता है और नींद के दौरान वायु मार्ग बहुत संकीर्ण हो जाता है, जिससे लोग रात में कई बार सांस लेना बंद कर देते हैं. यह जोर से खर्राटे आने का कारण भी बन सकता है.

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115 रोगियों पर किया उपयोग
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका उपचार मास्क है जो नाक या मुंह पर फिट किया जाता है. इसे एक निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) मशीन कहा जाता है, जो सांस लेने के मार्ग को खुला रखते हुए धीरे-धीरे मुंह और गले में हवा को धकेलता है. अध्ययन में 115 रोगियों को तीन महीने के लिए सीपीएपी का उपयोग करने के लिए कहा गया था, जिसमें उन्हें स्लीप एपनिया के मामलों में काफी सुधार देखने को मिला. शोधकर्ताओं ने सीपीएपी का उपयोग करने वाले रोगियों में थकान, अवसाद, सामाजिक और भावनात्मक कामकाज सहित कई अतिरिक्त कारकों में सुधार देखा.



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मदर्स डे मनाने के बाद ये जानें कैसे पूरे साल रखें मां का ख्‍याल…



बच्चे के जन्म लेने से लेकर सालों साल परिवार का ख्याल रखने की जिम्मेदारियों के बीच भागती-दौड़ती माएं सुपरहीरोज होती हैं. सबकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए वह सिर्फ अपना आराम ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत भी कुर्बान कर देती हैं. ऐसे में अब आपकी बारी है कि मां की सेहत का ख्याल रखें.

मैक्स अस्पताल, साकेत आर्थोपेडिक्स की डायरेक्टर रमणीक महाजन ने कहा कि भारतीय महिलाएं 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते घुटने और बोन मास का डिजनरेशन की समस्या से जूझने लगती हैं. भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस के जल्दी होने की वजह पोषक तत्वों की कमी और मोटापा है.

यहां पेश है रमणीक महाजन का सुझाव जिसे अपनाकर माताओं का बेहतर ख्याल रख सकते हैं-

जल्द पहचानें चेतावनी संकेत: आपने कई बार अपनी मां को जोड़ों के दर्द, अकड़न को लेकर शिकायत करते हुए और फिर उम्र बढ़ने का संकेत मानकर इसे नजरअंदाज करते हुए देखा होगा. ऐसे में विशेषज्ञ से विचारविमर्श करें. घुटनों में सुबह-सुबह दर्द, अकड़न, लॉकिंग एवं पॉपिंग से शुरुआत होने से लेकर जोड़ों में सूजन होने तक, यह आर्थराइटिस के संकेत हो सकते हैं जोकि एक प्रगतिशील ज्वाइंट स्थिति है. और अधिकतर भारतीय महिलाएं इन संकेतों को नजरअंदाज करती हैं.

सही समय पर पहचान: महिलाएं तभी डॉक्टर के पास जाती हैं जब यह स्थिति ऐसे स्टेज में पहुंच जाती है जब दर्द असहनीय हो जाता है. याद रखें कि देरी होने से जोड़ों को होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ सकता है.

वजन पर नजर: ओवरवेट होना भारतीय महिलाओं में आर्थराइटिस होने के सबसे प्रमुख जोखिम घटकों में से एक है. हमारे जोड़ कुछ हद तक वजन उठाने के लिए डिजाइन हैं. प्रत्येक 1 किलो अतिरिक्त वजन घुटनों पर चार गुना दबाव डाल सकता है. क्षमता से अधिक वजन जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए उचित वजन का मतलब है स्वस्थ जोड़.

30 मिनट की वाक: हर दिन 30 मिनट की वॉक हड्डियों एवं जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है.

छोटी-मोटी चोटों को गंभीरता से लें: हम जोड़ों के आसपास लगी छोटी-मोटी चोटों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. इससे हानिकारक स्थितियां पैदा हो सकती हैं. जैसे भविष्य में आर्थराइटिस हो सकता है. यदि दर्द बार-बार हो रहा है तो विशेषज्ञ की सलाह लें. हम अक्सर ऐसे मरीजों को देखते हैं जहां ज्वाइंट इंजरी ज्वाइंट डिजनरेशन का कारण बन जाती हैं.

शरीर के पॉश्चर पर रखें नजर: गलत पॉश्चर से जोड़ों, खासतौर से घुटने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. घुटने शरीर में सबसे अधिक भार सहन करने वाले जोड़ हैं. इससे घुटने में दर्द हो सकता है. सही पॉश्चर रखना, काम के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना, नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करना और अपने पॉश्चर को बीच-बीच में ठीक करने से घुटने के दर्द को कम करने में मदद मिलती है.

पेनकिलर्स को कहें ना: हमारे देश में खुद से दवाएं लेना एक आम समस्या है. आमतौर पर, हम अक्सर शरीर में दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लिए बिना पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं. पेनकिलर्स भले ही हमें दर्द से फौरन राहत दिलाते हैं पर, वह स्थिति का उपचार नहीं करते. इससे कई को-मॉर्बिड स्थितियां पैदा हो सकती हैं. इसलिए यदि आप अपनी मॉम को जोड़ों के दर्द के लिए खुद से पेनकिलर्स लेते हुए देखें, तो फौरन ऑथोर्पेडिस्ट के पास जाकर उनका परीक्षण कराएं.



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सुबह नाश्‍ता न करना और रात का भोजन देर से करना है खतरे की घंटी, बरते ये सावधानी



नई दिल्ली: जो लोग सुबह के समय नाश्ता नहीं करते और रात का खाना बहुत देर से खाते हैं, उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद बदतर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं. एक शोध रिपोर्ट के आधार पर ऐसी चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भोजन संबंधी इन दो आदतों वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के 30 दिनों के भीतर चार से पांच बार मौत के करीब चले जाने, एक और दिल का दौरा, या एनजाइना (सीने में दर्द) पाया गया. रिपोर्ट में रात के खाने और सोने के बीच न्यूनतम दो घंटे का अंतराल रखने की भी सलाह दी गई है.

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हार्टकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि भारतीयों में पेट के चारों ओर अधिक वसा एकत्र होने की प्रवृत्ति होती है, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है. इसका एक प्रमुख कारण आज की जीवनशैली है. उन्होंने कहा कि ऑन-द-गो और तेज रफ्तार जीवन का मतलब है कि लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं और दिन के शेष समय अस्वास्थ्यकर, क्विक-फिक्स भोजन खाते हैं. यह समझना महत्वपूर्ण है कि नियमित रूप से मध्यम तीव्रता के व्यायाम के साथ संयुक्त शरीर के वजन में 5 प्रतिशत की कमी भी टाइप-2 मधुमेह के जोखिम को 50 प्रतिशत से अधिक कम कर सकती है. मधुमेह के बिना या इस स्थिति के विकास के जोखिम के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर स्विच करने और एक आदर्श बीएमआई बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

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टाइप-2 मधुमेह का खतरा
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, आहार एक व्यक्ति के वजन से स्वतंत्र मधुमेह के जोखिम को प्रभावित करता है. टाइप-2 मधुमेह को एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में जाना जाता है. जब तक इसका निदान किया जाता है, तब तक अन्य संबंधित स्वास्थ्य जटिलताएं पहले से मौजूद हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग मोटे होते हैं, उन्हें जटिल कार्बोहाइड्रेट के सेवन को सीमित करने का लक्ष्य रखना चाहिए, क्योंकि वे रक्त-शर्करा के स्तर और इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं. इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों में, इस वृद्धि से आगे वजन बढ़ सकता है. इसके अलावा, हर दिन लगभग 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें, सप्ताह में पांच बार.

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डॉ. अग्रवाल के कुछ सुझाव :
– हर दिन व्यायाम करें और स्वस्थ आहार का सेवन करें.
– नियमित अंतराल पर अपने रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करें.
– किसी भी रूप में परिष्कृत चीनी का सेवन न करें, क्योंकि यह रक्त प्रवाह में अधिक आसानी से
अवशोषित हो सकता है और आगे की जटिलताओं का कारण बन सकता है.
– ध्यान और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से तनाव को कम करें.

(एजेंसी से इनपुट)

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आज से बनाएं सुबह का नाश्ता करने की आदत, वरना आपकी जान को हो सकता है खतरा



ब्रासीलिया. क्या आप सुबह का नाश्ता नहीं करते और रात का खाना भी देर से खाते हैं? अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे आपकी जान को खतरा हो सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी दी है. प्रिवेन्टिव कार्डियोलॉजी के यूरोपीय जर्नल ‘द फाइंडिग्स’ में छपे शोध पत्र में बताया गया है कि इस प्रकार के अस्वास्थ्यकारी जीवनशैली वाले लोगों में समय से पहले मौत होने की संभावना चार से पांच गुणा बढ़ जाती है. वहीं, दूसरा दिल का दौरा पड़ने की भी संभावना बढ़ जाती है.

शोध के सह-लेखक ब्राजील के साउ-पाउलो सरकारी विश्वविद्यालय के मार्कोस मिनीकुची का कहना है, “हमारे शोध के नतीजों से पता चलता है कि खाना खाने के गलत तरीके को जारी रखने का नतीजा बहुत खराब हो सकता है, खासतौर से दिल के दौरे के बाद.” उन्होंने बताया कि यह शोध दिल के दौरे के शिकार 113 मरीजों पर किया गया, जिनकी औसत उम्र 60 साल थी. इनमें 73 फीसदी पुरुष थे. इसमें पाया गया कि सुबह का नाश्ता नहीं करनेवाले मरीज 58 फीसदी थे, जबकि रात का भोजन देर से करने वाले मरीज 51 फीसदी थे, और 48 फीसदी मरीजों में दोनों तरह की आदतें पाई गई.

उनकी टीम की सलाह है कि खाने की आदत को सुधारने के लिए रात के भोजन और सोने के समय में कम से कम 2 घंटे का अंतर होना चाहिेए. टीम ने कहा, “एक अच्छे नाश्ते में ज्यादातर दुग्ध उत्पादों (फैट फ्री या लो फैट दूध, दही और पनीर), कार्बोहाइड्रेट (गेंहू की रोटी, सेंके हुए ब्रेड, अनाजों) और फलों को शामिल करना चाहिए.



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Tips: इन 6 बातों का रखें ध्‍यान, तो गर्मियों में एक बार भी नहीं पड़ेंगे बीमार…



गर्मी का मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है. गर्मी और उमस के बीच यह इम्यून सिस्टम को भी प्रभावित करता है. पाचन और त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ ही मौसमी फ्लू और संक्रमण का भी इस दौरान खतरा बना रहता है.

ठंडा या गर्म, कैसा दूध पीना सेहत के लिए ज्‍यादा फायदेमंद है?

ऐसे में गर्मी को लेकर पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए. गर्मी में होने वाली बीमारियों से परहेज करने या लड़ने के लिए स्टेहैप्पी फार्मेसी के प्रबंध निदेशक डॉ. सुजीत पॉल कुछ जरूरी टिप्स साझा किए हैं-

रहें हाइड्रेटेड: यदि आपके शरीर में पर्याप्त पानी है तो आप 90 फीसदी बीमारियों से लड़ सकते हैं. पानी को शरीर के फाइबर द्वारा हमारे कोलोन में खींच लिया जाता है और यह नरम मल बनाने में शरीर की मदद करता है. साथ ही बिना किसी तकलीफ के इसका रास्ता भी आसान हो जाता है.

फाइबर इनटेक: अनाज, सब्जियां, फलियां और फल जैसे फाइबर के बेहतरीन स्रोत वाले खाद्य पदार्थ हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त करते हैं और व्यक्ति कब्ज होने की आशंका से दूर होता है, जो अंतत: फिशर का कारण बनता है.

कम कैफीन: गर्मी में कैफीन का सेवन भी आपके पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, जो आगे चलकर अल्सर, एसिडिटी और जलन का कारण बनता है.

वर्कआउट: पसीने का निकलना बहुत अच्छा है क्योंकि यह आपके शरीर से गंदगी को निकालने में मदद करता है. साथ ही आपके शरीर को फिट और स्वस्थ रखने में भी सहायक है. हम जितना अधिक शारीरिक तौर पर सक्रिय रहेंगे, हमारे लिए जीवन खुशहाल होगा.

धूप से दूरी: संभव हो तो धूप में तीन घंटे से ज्यादा रहने से परहेज करें और सूती जैसे हल्के कपड़े पहनें.

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नियमित हेल्थ चेकअप: कई बार हम कुछ लक्षणों की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए डॉक्टर के पास जाने से परहेज करते हैं. लेकिन बेहतर होगा कि स्वास्थ्य के मालमों में हम विशेषज्ञ से संपर्क करें. किसी भी तरह की गंभीर समस्या से बचने के लिए नियमित तौर पर हेल्थ चेकअप के लिए जाना चाहिए.

गरमी के मौसम में कई अन्य तरह की समस्या भी हो जाती है, जैसे- जॉन्डिस, टाइफॉयड और फूड प्वायजनिंग आदि. बेहतर होगा कि आप अपने खान- पान की आदतों के साथ धूप में समय बिताने को लेकर सतर्क रहें.

बाहर के खाने से परहेज, मील्स नहीं छोड़ना और बाहरी ड्रिंक एवं अल्कोहल की बजाय स्वास्थ्यकर विकल्पों जैसे छोटे बदलाव बड़ा अंतर ला सकते हैं. ये छोटे लेकिन अनहेल्दी आदतें आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
(एजेंसी से इनपुट)

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Tips: सुबह-सुबह पीये एक कप कॉफी, इस खतरनाक बीमारी का खतरा होगा कम


टोक्यो: सुबह का बेहतरीन पेय होने के साथ ही कॉफी प्रोस्टेट कैंसर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे दवा-प्रतिरोधी कैंसर के इलाज का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. जापान के कनाजावा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल तत्वों की पहचान की है, जो प्रोस्टेट कैंसर की वृद्धि को रोक सकते हैं.

ये दोनों तत्व हाइड्रोकॉर्बन यौगिक हैं, जो प्राकृतिक रूप से अरेबिका कॉफी में पाए जाते हैं. इसके पायलट अध्ययन से पता चलता है कि कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल कोशिकाओं की वृद्धि को रोक सकते हैं, जो आम कैंसर रोधी दवाओं जैसे कबाजिटेक्सेल का प्रतिरोधी है. शोध के प्रमुख लेखक हिरोकी इवामोटो ने कहा कि हमने पाया कि कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल ने चूहों में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोक दी, लेकिन इसका संयोजन एक साथ ज्यादा प्रभावी होगा.

Tips: क्‍या प्रेग्‍नेंसी में हल्‍दी वाला दूध पीया जा सकता है?

इस शोध के लिए दल ने कॉफी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले छह तत्वों का परीक्षण किया. इस शोध को यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में बार्सिलोना में प्रस्तुत किया गया. शोध के तहत मानव की प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं पर प्रयोगशाला में अध्ययन किया गया.



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Tips: करें ये छोटा सा काम, Life में हमेशा रहेंगी खुशियां, कभी नहीं आएगा दुख



नई दिल्‍ली: जीवन में कभी सुख और कभी दुख का सिलसिला चलता रहता है. ऐसे में लोगों को चाहिए कि वो कुछ ऐसा काम करें कि दुख कभी ना आए और अगर आए भी तो फौरन चला जाए. इसके लिए आपको कुछ जरूरी उपाय करने चाहिए. ताकि आपके घर में खुशियां हमेशा बनी रहे तो आइये जानते हैं वो उपाय…

Tips: पार्क में बिताएं सिर्फ 20 मिनट, मिलेगी खुशियां, आप भी होंगे सेहतमंद

1. कुछ छोटे-छोटे उपाय बड़े काम के हैं. ऐसा करने से कई प्रकार की समृद्धि व स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होने की मान्‍यता है, जैसे किसी देवी मंदिर में जाकर पांच मंगलवार ध्‍वज पताका फहराएं और आर्थिक समृद्धि की कामना करें, आपकी सभी इच्‍छाएं पूरी होंगी.

2. अगर धन की चाहत है तो हर मंगलवार तांबा, केसर, कस्‍तूरी, गेंहू, लाल गुलाब, शहद, लाल मूंगा, लाल मिर्च, लाल पत्‍थर आदि चीजों का दान करें. समय के साथ पैसा आने लगेगा.

3. अमावस्‍या के दिन अच्‍छे से घर की सफाई करें, सुबह और शाम को गूगल की धूप से घर में खुशबू फैलाएं. यह लाल किताब का उपाय घर को बीमारी से दूर रखता है.

Tips: दोपहर के खाने के बाद सोना सही है? क्‍या होता है सेहत पर असर?

4. घर के अग्निकोण में पानी की कोई टंकी नहीं होनी चाहिए. यह जगह वास्‍तु शास्‍त्र से अग्निदेव की है. यहां आप लाल रंग का हमेशा बल्‍ब जला कर रखें.

5. एक तांबे के लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा सा लाल चंदन मिला दें, उस पात्र को अपने सिरहाने रखकर रात को सो जाएं. सुबह उठकर सबसे पहले उस जल को तुलसी के पौधे में चढ़ा दें, ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपकी परेशानी धीरे-धीरे दूर हो जाएगी.

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