अगर बर्गर, पिज्जा और नूडल्स के हैं शौकीन, तो आपके लिए है ये बुरी खबर



नई दिल्ली: बर्गर, पिज्जा और नूडल्स सहित अन्य फास्ट फूड का स्वाद, सेहत के लिए खतरा साबित हो रहा है. अग्रणी शोध संस्था सेंटर फॉर सांइस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है. रिपोर्ट के अनुसार बाजार में उपलब्ध लगभग सभी नामी कंपनियों के जंक फूड में नमक और वसा की मात्रा निर्धारित सीमा से खतरनाक स्तर तक ज्यादा पायी गयी है.

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एफएसएसएआई ने एक बयान में कहा कि उसने जंक फूड से संबंधित नियमों को गंभीरता से लिया है और टिप्पणियों के लिए जनता में पहले ही मसौदा अधिसूचना तैयार कर ली है. उसने एक बयान में कहा कि हमने स्कूलों तथा उसके 50 मीटर के दायरों में जंक फूड पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने में इन नियमों को लागू करने की संभावनाएं तलाश करने के लिए अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ ही राज्य सरकार को परामर्श भी जारी किया है. जल्द ही मसौदा अधिसूचना को अधिसूचित किया जाएगा और हम कार्यान्वय के तरीकों पर विचार करेंगे. एफएसएसएआई स्कूलों के साथ-साथ एक परामर्श समिति गठित करने पर काम कर रहा है जो इसका कार्यान्वयन देखेगी.

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‘कोड रेड’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने मंगलवार को ‘कोड रेड’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से बताया कि भारतीय बाजार में उपलब्ध अधिकतर पैकेट बंद खाना और फास्ट फूड में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों से बहुत ज्यादा है. नारायण ने संवाददाताओं को बताया कि एफएसएसएआई ने फास्ट फूड कंपनियों को इन उत्पादों में इस्तेमाल किये गये खाद्य पदार्थों का मात्रा पैकेट पर दर्शाने के लिए इस साल जुलाई में दिशानिर्देश तैयार किये थे, लेकिन सरकार ने इन्हें अब तक अधिसूचित कर लागू नहीं किया है.

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33 उत्पादों की प्रयोगशाला जांच में खुलासा
उन्होंने बताया शोध में चिप्स, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर और नमकीन सहित अन्य फास्ट फूड के सभी अग्रणी कंपनियों के 33 उत्पादों की प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि इनमें नमक और वसा की मात्रा खतरनाक स्तर पर इस्तेमाल की जा रही है. सभी 33 लोकप्रिय जंकफूड में कोई भी उत्पाद निर्धारित मानकों के पालन की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका. नारायण ने कहा कि सरकार ने 2013 में इस विषय पर फास्ट फूड कंपनियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने के लिए एफएसएसएआई के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी. उन्होंने कहा कि पिछले सात साल में तीन समितियां गठित हो चुकी हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कानूनी पहल नहीं हुयी.

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निर्धारित मानकों का पालन स्वाद पर भारी
फास्ट फूड कंपनियों द्वारा निर्धारित मात्रा में इन तत्वों के इस्तेमाल से परहेज होने के कारण के सवाल पर नारायण ने कहा कि नमक, वसा और शर्करा सहित अन्य तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों का पालन स्वाद पर भारी पड़ता है, इसलिये कंपनियां स्वाद के साथ कोई समझौता करने को तैयार नहीं है. ऐसे में सरकार दुनिया की इन नामी कंपनियों के दबाव में कानून बनाकर एफएसएसएआई के मानकों का पालन करने के लिये (उन्हें) मजबूर करने से बच रही है. उन्होंने कहा कि जंक फूड में नमक, शर्करा और वसा सहित अन्य तत्वों की निर्धारित मात्रा के मुताबिक इस्तेमाल की मात्रा का इन उत्पादों के पैकेट पर स्पष्ट उल्लेख करने के लिये कानूनी बाध्यता को तत्काल लागू करने की जरूरत है. नारायण ने कहा कि जनस्वास्थ्य पर कंपनियों का हित भारी नहीं पड़े, इसके लिये फास्ट फूड उत्पादों में नमक, शर्करा और वसा का निर्धारित मात्रा से अधिक इस्तेमाल होने पर तंबाकू उत्पादों की तर्ज पर स्पष्ट चेतावनी (रेड वार्निंग) पैकेट पर दर्ज करने को अनिवार्य बनाया जाये.



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Alert: आप कितने घंटे देखते हैं टीवी? अगर जवाब है ये तो संभल जाइये, खतरे में है आपका दिल



न्यूयॉर्क: आपके हृदय के लिए ज्यादा घंटे तक बैठकर काम करने से ज्यादा खतरनाक बैठकर टीवी देखना है. एक अध्ययन में यह दावा किया गया है. यह अध्ययन अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने किया है. इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि खाली समय में बैठकर टीवी देखने से हृदय संबंधित बीमारियों और मौत के खतरे बढ़ जाते हैं.

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यह अध्ययन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन के लेखक कीथ एम डियाज ने कहा कि हमारे शोध से निकले परिणाम यह दिखाते हैं कि आप काम के इतर क्या करते हैं, यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए ज्यादा मायने रखता है. डियाज ने कहा कि अगर आपकी नौकरी ज्यादा घंटे तक बैठकर करने वाली है और आप घर पर बिताए गए समय में व्यायाम करते हैं तो इससे हृदय संबंधी बीमारी और मौत का खतरा कम होता है.

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3,592 लोगों पर अध्ययन
इस अध्ययन के लिए अध्ययनकर्ताओं ने करीब साढ़े आठ साल तक 3,592 लोगों की गतिविधियों पर नजर रखा. इस अध्ययन में हिस्सा लेने वालों ने बताया कि उन्होंने कितने घंटे बैठकर टीवी देखा और कितने घंटे बैठकर काम किया. इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि चार घंटे या उससे अधिक घंटे एक दिन में टीवी देखने वाले लोगों में हृदयाघात या मौत का खतरा वैसे लोगों से ज्यादा था जिन्होंने प्रतिदिन दो घंटे से कम समय तक टीवी देखा. (इनपुट एजेंसी)

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Alert: स्मार्टफोन पास रखकर सोना है खतरनाक, घटती है यौन क्षमता, सर्वे रिपोर्ट का दावा



लंदन: स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से हमारे मन की स्थिति तो प्रभावित हो ही रही है, अब इसका असर लोगों के यौन जीवन पर पड़ने की बात भी सामने आई है. एक नए अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. मोरक्को के कासाब्लांका में शेख खलीफा बेन जायद अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय अस्पताल के यौन स्वास्थ्य विभाग ने खुलासा किया है कि अध्ययन के दायरे में शामिल किए गए लगभग 60 फीसदी लोगों ने स्मार्टफोन के कारण अपने यौन जीवन में आई समस्याएं स्वीकार की हैं.

मोरक्को वल्र्ड न्यूज की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि सभी 600 प्रतिभागियों के पास स्मार्टफोन थे और इनमें से 92 फीसदी लोगों ने इसे रात में उपयोग करने की बात स्वीकार की. उनमें से केवल 18 फीसदी लोगों ने अपने फोन को शयनकक्ष में फ्लाइट मोड में रखने की बात कही. अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन ने 20 से 45 वर्ष की आयु के वयस्कों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया, जिसमें 60 फीसदी ने कहा कि फोन ने उनकी यौन क्षमता को प्रभावित किया है. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लगभग 50 फीसदी लोगों ने यौन जीवन के बेहतर नहीं होने की बात कही, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक स्मार्टफोन का उपयोग किया.

अमेरिका की एक कंपनी श्योरकॉल के एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि लगभग तीन-चौथाई लोगों ने माना कि वे रात में अपने बिस्तर पर या उसके बगल में अपने स्मार्टफोन को रखकर सोते हैं. जो लोग अपने पास फोन रखकर सोते हैं, उन्होंने डिवाइस से दूर होने पर डर या चिंता महसूस करने की बात कही. अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से एक तिहाई ने माना कि इनकमिंग कॉल का जवाब देने की मजबूरी से भी सेक्स में बाधा पहुंचती है.



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Health Alert: भारत में तेजी से बढ़ रही ये खतरनाक बीमारी, 2025 तक होंगे 6.9 करोड़ रोगी



नई दिल्ली: केंद्र सरकार का मानना है कि देश में मधुमेह इतनी तेजी से फैल रहा है कि आने वाले पांच वर्षो में मुधमेह रोगियों की संख्या 266 प्रतिशत बढ़ सकती है. आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाईक ने शुक्रवार को लोकसभा में मधुमेह पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भारत में वर्ष 2025 तक मधुमेह रोगियों की तादाद 6.99 करोड़ तक पहुंच सकती है.

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सरकार जहां विभिन्न अवसरों पर मधुमेह से बचाव के अभियान चला रही है, वहीं अब इसके उपचार के लिए हर्बल दवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. काउंसिल ऑफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च यानी सीएसआईआर की मदद से हर्बल दवाओं की खोज की गई है. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, लखनऊ स्थित भारत सरकार के शोध संगठन ने मुधमेह की हर्बल दवाएं बनाई हैं. ये हर्बल दवा वैज्ञानिक तौर पर भी मान्य व पुष्ट हैं. फिलहाल एमिल फार्मा मधुमेह की इन दवाओं का उत्पादन कर रही है.

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मधुमेह रोगियों की संख्या में इजाफा खतरनाक
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मधुमेह रोगियों की संख्या में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है व काफी खतरनाक है. दुनिया के कम ही देश ऐसे हैं जहां 2025 तक इसके रोगियों में लगभग 266 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाएगी. ऐसे में आयुष मंत्रालय योग व आयुर्वेद दोनों के एक साथ इस्तेमाल से इस बढ़ती चुनौती को काबू करना चाहता है. इसी के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय व आयुष ने गुजरात, बिहार व राजस्थान के कुछ जिलों में मिलकर काम करने की योजना बनाई.

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केंद्रीय आयुष मंत्री ने किया ये खुलासा
योजना में मिली प्रारंभिक सफलता के बाद अब बिहार, गुजरात व राजस्थान में 52 स्थानों पर मधुमेह व दिल की बीमारियों से निपटने के लिए आयुर्वेद व योग की मदद ली जा रही है. टाइप-2 डायबिटीज में भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च बीजीआर-34 कारगर है. ये खुलासा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों के शोध में हुआ है. लोकसभा में शुक्रवार को केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने खुलासा किया कि डायबिटीज रोगियों को बीजीआर-34 एंटी डायबिटीज मेडिसिन से काफी लाभ पहुंच रहा है.

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गहन अध्ययन के बाद बीजीआर-34 नामक दवा तैयार
मंत्रालय के अधीन सीएसआईआर ने गहन अध्ययन और लखनऊ स्थित प्रयोगशालाओं में लंबे ट्रायल के बाद इसे तैयार किया था. टाइप 1 डायबिटीज मरीजों को इससे काफी लाभ मिला है और अब बीएचयू की रिसर्च के बाद सरकार इसे टाइप 2 रोगियों के लिए भी इस्तेमाल करेगी. केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने कहा कि मंत्रालय के अधीन सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने काफी गहन अध्ययन के बाद बीजीआर-34 नामक दवा तैयार की है जिसमें कई औषधियां हैं जो डायबिटीज को नियंत्रण करने में सहायक सिद्घ होती हैं.



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Health Alert: भारत में तेजी से बढ़ रही ये खतरनाक बीमारी, 2025 तक होंगे 6.9 करोड़ रोगी



नई दिल्ली: केंद्र सरकार का मानना है कि देश में मधुमेह इतनी तेजी से फैल रहा है कि आने वाले पांच वर्षो में मुधमेह रोगियों की संख्या 266 प्रतिशत बढ़ सकती है. आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाईक ने शुक्रवार को लोकसभा में मधुमेह पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भारत में वर्ष 2025 तक मधुमेह रोगियों की तादाद 6.99 करोड़ तक पहुंच सकती है.

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सरकार जहां विभिन्न अवसरों पर मधुमेह से बचाव के अभियान चला रही है, वहीं अब इसके उपचार के लिए हर्बल दवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. काउंसिल ऑफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च यानी सीएसआईआर की मदद से हर्बल दवाओं की खोज की गई है. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, लखनऊ स्थित भारत सरकार के शोध संगठन ने मुधमेह की हर्बल दवाएं बनाई हैं. ये हर्बल दवा वैज्ञानिक तौर पर भी मान्य व पुष्ट हैं. फिलहाल एमिल फार्मा मधुमेह की इन दवाओं का उत्पादन कर रही है.

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मधुमेह रोगियों की संख्या में इजाफा खतरनाक
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मधुमेह रोगियों की संख्या में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है व काफी खतरनाक है. दुनिया के कम ही देश ऐसे हैं जहां 2025 तक इसके रोगियों में लगभग 266 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाएगी. ऐसे में आयुष मंत्रालय योग व आयुर्वेद दोनों के एक साथ इस्तेमाल से इस बढ़ती चुनौती को काबू करना चाहता है. इसी के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय व आयुष ने गुजरात, बिहार व राजस्थान के कुछ जिलों में मिलकर काम करने की योजना बनाई.

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केंद्रीय आयुष मंत्री ने किया ये खुलासा
योजना में मिली प्रारंभिक सफलता के बाद अब बिहार, गुजरात व राजस्थान में 52 स्थानों पर मधुमेह व दिल की बीमारियों से निपटने के लिए आयुर्वेद व योग की मदद ली जा रही है. टाइप-2 डायबिटीज में भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च बीजीआर-34 कारगर है. ये खुलासा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों के शोध में हुआ है. लोकसभा में शुक्रवार को केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने खुलासा किया कि डायबिटीज रोगियों को बीजीआर-34 एंटी डायबिटीज मेडिसिन से काफी लाभ पहुंच रहा है.

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गहन अध्ययन के बाद बीजीआर-34 नामक दवा तैयार
मंत्रालय के अधीन सीएसआईआर ने गहन अध्ययन और लखनऊ स्थित प्रयोगशालाओं में लंबे ट्रायल के बाद इसे तैयार किया था. टाइप 1 डायबिटीज मरीजों को इससे काफी लाभ मिला है और अब बीएचयू की रिसर्च के बाद सरकार इसे टाइप 2 रोगियों के लिए भी इस्तेमाल करेगी. केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने कहा कि मंत्रालय के अधीन सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने काफी गहन अध्ययन के बाद बीजीआर-34 नामक दवा तैयार की है जिसमें कई औषधियां हैं जो डायबिटीज को नियंत्रण करने में सहायक सिद्घ होती हैं.



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Health Tips: पुरुष यूं कर सकते हैं अपने बालों की देखभाल, अपनाएं ये नौ उपाय



नई दिल्ली: केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी उनके लुक को बेहतर बनाने में बालों की भूमिका अहम है. अगर पुरुष अपनी दाढ़ी और मूंछ का ख्याल अच्छे से रख सकते हैं तो ऐसे में बालों को अनदेखा करना उचित नहीं है. लॉरियल पेरिस और दिल्ली में स्थित लुकुलन स्टूडियोज की ओर से ऐसे ही कुछ खास टिप्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बालों को स्वस्थ रख सकते हैं.

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ये नौ उपाय अपनाएं
1. पुरुषों के लिए अधिकतर मार्केट में जिस तरह के उत्पादों को लॉन्च किया जाता है, उनमें 2 इन वन या थ्री इन वन इस तरह की विशेषताएं होती हैं. ऐसे में एक ही साथ शैम्पू, कंडीशनर या बॉडी वॉश के रूप में काम आने वाले किसी ऐसे प्रोडक्ट का इस्तेमाल आपको बेहतर लग सकता है, लेकिन कोशिश हमेशा एक कम्प्लीट हेयर केयर सिस्टम में निवेश करने की करें. हर एक चीज के लिए अलग-अलग उत्पादों का ही इस्तेमाल करें. इनका चुनाव अपने हेयर टाइप के मुताबिक करें.
2. बालों को सुखाते समय उन्हें तौलिए से न घिसें, इससे बाल कमजोर हो जाते हैं और आसानी से टूटने या झड़ने लगते हैं, तो इस समस्या से बचने के लिए उन्हें हल्के हाथों से धीरे-धीरे सुखाएं.
3. हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कम से कम मात्रा में करें.

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4. भले ही पुरुष हेयर कर्लिग या फ्लैट आयरन का इस्तेमाल न करते हों, लेकिन बालों को सुखाने के लिए पुरुष अकसर ब्लो-ड्रायर का उपयोग अकसर करते हैं. ऐसे में जितना संभव हो सके, इससे दूरी बनाकर रखें और अगर करते भी हैं तो हीट प्रोटेक्टेंट का इस्तेमाल जरूर करें.
5. अनचाहे दोमुंहे बालों से छुटकारा पाने के लिए समय-समय पर ट्रिमिंग कराते रहे.
6. बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए डायट का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. विटामिन बी6, बी12 और फॉलिक एसिड बालों के लिए बहुत जरूरी है. केले और आलू जैसे स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थो में विटामिन बी6 की भरपूर मात्रा होती है. बी12 के लिए मीट, मछली और दुग्ध उत्पादों का सेवन किया जा सकता है. फॉलिक एसिड के लिए ताजे फल और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें, खासकर इसके लिए टमाटर या सिट्रिक या खट्टे फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें. प्रोटीन बालों के लिए बहुत जरूरी हैं, ऐसे में दाल और बीन्स को अपने दैनिक आहार में जोड़ें, हालांकि कई बार इन सारी चीजों का पर्याप्त मात्रा में सेवन संभव नहीं हो पाता है तो ऐस में रोज एक मल्टीविटामिन जरूर लें.
9. बालों और जड़ों के लिए तेल बहुत महत्वपूर्ण है. गर्मियों में नारियल तेल और सर्दियों में जैतून या बादाम के तेल से सिर में हल्के हाथों से मालिश करें. बेहतर परिणाम के लिए तेल में थोड़ा सा प्याज का रस मिला लें और फिर उसे बालों में लगाएं, इससे बाल काफी लंबे समय तक अच्छे बने रहते हैं.

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Tips: अगर खर्राटों से हैं परेशान तो सोते समय करें ये काम, मिलेगा फौरन आराम



लंदन: शोधकर्ताओं ने पाया है कि रात के समय चेहरे पर मास्क लगाना उन लोगों के ऊर्जा स्तर और जीवन शक्ति में सुधार कर सकता है, जो स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं. स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें रात को सोते समय सांस लेने में तकलीफ और खर्राटे आने की शिकायत रहती है. फेस मास्क को सीपीएपी मशीन भी कहा जाता है. यह वर्तमान में केवल उन लोगों के लिए ही अनुशंसित है, जिनकी स्लीप एपनिया मध्यम स्तर से गंभीर हो चुकी है.

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अध्ययन द लांसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसके लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के 11 राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) स्लीप सेंटर से 200 से अधिक रोगियों को शामिल किया. उन्होंने स्लीप एपनिया से जुड़े मध्यम मामलों में उपचार के विभिन्न पहलुओं की जांच की. अध्ययन के मुख्य लेखक मैरी मोरेल ने कहा, “हम स्लीप एपनिया और इसके रोगियों के बढ़ते मामलों को देख रहे हैं. पहले हालांकि यह मुख्य रूप से अधिक वजन वाले पुरुषों को प्रभावित करता रहा है. अब हम जानते हैं कि इसका असर रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं, बुजुर्गो और यहां तक कि बच्चों पर भी होता है.

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विश्व के एक अरब से अधिक युवा स्लीप एपनिया के शिकार
मोरेल ने कहा कि स्लीप एपनिया के सभी मामलों में लगभग 60 फीसदी मामलों को हल्के के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन अब तक हमें नहीं पता था कि सीपीएपी इन रोगियों के लिए मददगार होगा या नहीं. स्लीप एपनिया विश्व स्तर पर एक अरब से अधिक वयस्कों को प्रभावित करता है और नींद के दौरान वायु मार्ग बहुत संकीर्ण हो जाता है, जिससे लोग रात में कई बार सांस लेना बंद कर देते हैं. यह जोर से खर्राटे आने का कारण भी बन सकता है.

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115 रोगियों पर किया उपयोग
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका उपचार मास्क है जो नाक या मुंह पर फिट किया जाता है. इसे एक निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) मशीन कहा जाता है, जो सांस लेने के मार्ग को खुला रखते हुए धीरे-धीरे मुंह और गले में हवा को धकेलता है. अध्ययन में 115 रोगियों को तीन महीने के लिए सीपीएपी का उपयोग करने के लिए कहा गया था, जिसमें उन्हें स्लीप एपनिया के मामलों में काफी सुधार देखने को मिला. शोधकर्ताओं ने सीपीएपी का उपयोग करने वाले रोगियों में थकान, अवसाद, सामाजिक और भावनात्मक कामकाज सहित कई अतिरिक्त कारकों में सुधार देखा.



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Tips: सुबह-सुबह पीये एक कप कॉफी, इस खतरनाक बीमारी का खतरा होगा कम


टोक्यो: सुबह का बेहतरीन पेय होने के साथ ही कॉफी प्रोस्टेट कैंसर को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे दवा-प्रतिरोधी कैंसर के इलाज का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. जापान के कनाजावा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल तत्वों की पहचान की है, जो प्रोस्टेट कैंसर की वृद्धि को रोक सकते हैं.

ये दोनों तत्व हाइड्रोकॉर्बन यौगिक हैं, जो प्राकृतिक रूप से अरेबिका कॉफी में पाए जाते हैं. इसके पायलट अध्ययन से पता चलता है कि कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल कोशिकाओं की वृद्धि को रोक सकते हैं, जो आम कैंसर रोधी दवाओं जैसे कबाजिटेक्सेल का प्रतिरोधी है. शोध के प्रमुख लेखक हिरोकी इवामोटो ने कहा कि हमने पाया कि कहविओल एसिटेट व कैफेस्टोल ने चूहों में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोक दी, लेकिन इसका संयोजन एक साथ ज्यादा प्रभावी होगा.

Tips: क्‍या प्रेग्‍नेंसी में हल्‍दी वाला दूध पीया जा सकता है?

इस शोध के लिए दल ने कॉफी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले छह तत्वों का परीक्षण किया. इस शोध को यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में बार्सिलोना में प्रस्तुत किया गया. शोध के तहत मानव की प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं पर प्रयोगशाला में अध्ययन किया गया.



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Holi 2019: होली के रंग से अपने बालों को कैसे करें सुरक्षित, जानिए ये खास टिप्‍स



नई दिल्‍ली: रंग, उत्‍साह और आपसी भाईचारे का त्‍योहार होली इस साल 21 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन लोग बड़े ही उत्साह और मस्ती के साथ एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और होली की शुभकामनाएं देते हैं. यही कारण है कि होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अक्‍सर होली खेलने के बाद इसका बुरा असर हमारे शरीर पर पड़ता है. ऐसे में कुछ सावधानी बरती जाए तो हम रंग के दुष्‍प्रभाव से बच सकते हैं. होली खेलते समय हानिकारक केमिकल युक्त रंगों से हमारे बालों को ज्‍यादा नुकसान होता है, ऐसे में जानिए कि हमें क्‍या सावधानी बरतनी चाहिए.

Holi 2019: कब है होली, जानिए होलिका दहन के नियम और शुभ मुहूर्त

होली खेलने से पहले बालों में लगाए ये तेल
सिल्की और स्ट्रेट बाल उतने रूखे नहीं होते हैं, जितने की घुंघराले बाल, क्योंकि इनमें क्यूटिकल्स बंद होते हैं. कहीं बाहर जाने से पहले एलोवेरा या जैस्मिन युक्त नारियल तेल अच्छी तरह से लगाएं. नारियल तेल 90 प्रतिशत तक बालों को नुकसान से बचाता है. यह आपके बालों पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है जिससे आपके बाल न केवल रंगों के दुष्प्रभाव से बच जाते हैं, बल्कि धूप और धूल से भी उनका बचाव होता है.

Holi 2019: गुलाल गोटा के जरिये मुस्लिम परिवार बनाते हैं हिन्दू त्यौहार को रंगीन, जानिए गुलाबी नगरी की ये परंपरा

अगर घुंघराले है बाल तो ऐसे करें ख्‍याल
घुंघराले बालों की अपनी खासियत होती है लेकिन इसमें प्राकृतिक रूप से चमक कम होती है. क्योंकि, घुंघराले बालों के क्यूटिकल्स ज्यादा खुले होते हैं, इसलिए यह आसानी से टूट जाते हैं. ये रूखे होते हैं और बहुत जल्दी उलझ जाते हैं. बालों का सही पोषण बनाए रखने के लिए होली खेलने जाने से पहले उन्हें धोने के बाद नारियल तेल लगाना नहीं भूलें. इससे बालों में एक अच्छी चमक आ जाती है. क्योंकि नारियल तेल काफी हल्का होता है, इसलिए आपके बाल चिपचिपे नहीं होंगे और उन्हें संभालना ज्यादा आसान होगा.

Holi 2019: जमकर खेलें होली, लेकिन संभलकर, बाहर निकलने से पहले जरूर करें ये काम

कलर किए बालों को ऐसे बचाएं
कलर किए गए बालों पर गुनगुना नारियल तेल लगाएं क्योंकि कलर किए हुए बाल को पहले से ही रसायनों की वजह से नुकसान पहुंच चुका होता है, इसलिए यह जरूरी है कि होली खेलने जाने से पहले आप बालों की जड़ों में नारियल तेल लगाएं. इससे बाल सुरक्षित रहेंगे और उनका रंग उड़ने से बच जायेगा.

Holashtak 2019: लग गया होलाष्‍टक, जानें इन 8 दिनों में क्‍या करें क्‍या नहीं…

बालों को करें शैम्‍पू
होली खेलने के बाद आपके बालों को ज्यादा से ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. बालों से रंग के अंश निकालने के लिए आपको कई बार शैम्पू करना होगा. हर दिन अपने बालों को माइल्ड शैम्पू से धोएं ताकि बाकी बचे रंग और धूल-मिट्टी निकल जाए. इसके बाद गुनगुना नारियल तेल लगाएं. इससे बालों को पोषण मिलेगा.

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