Premature Deaths: Researchers Develop Tool to Tackle Diet Epidemic in India



As a disproportionately high number of premature deaths in India are caused by preventable diet-related disease, researchers from several institutes including those from the All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) Delhi are collaborating to develop a measurement tool to capture dietary data at a national level.

India is one of a growing number of developing countries to experience the double burden of malnutrition, where high levels of undernutrition coexist alongside over-nutrition, obesity and Type-2 diabetes.

More than 60 per cent of premature deaths can be attributed to preventable cardiovascular disease, obesity and type 2 diabetes, highlighting the pressing need for further research in this area.

The researchers are developing the tool to capture data at a national level to enable healthcare professionals and policymakers to make informed decisions to tackle the epidemic.

“Interpretation of nutrition research is as complex as the cooking in India where the dialect and the diet change every 100 miles. Understanding the impact of diet on cognitive aging can be interesting,” AB Dey, Professor and Head Department of Geriatric Medicine AIIMS Delhi said in a statement.

Among some of the issues being addressed by the collaboration between AIIMS, the University of Southern California and Queen’s University Belfast are whether spices are protective in the genesis of dementia and the possible impact of a protein-deficient diet on the aging of the brain.

Besides, is it possible, for instance, to develop a tool that can capture the dietary pattern across the country?

“Through working with leading researchers, dieticians and medical clinicians in India, we have developed a suitable measure of habitual diet that takes into account diverse eating patterns and socioeconomic gradients in the population who have high susceptibility to both nutrient deficiency and non-communicable disease,” said Claire McEvoy, Lecturer at Queen’s University Belfast, School of Medicine, Dentistry and Biomedical Sciences.

“As the population is set to increase, the double burden of malnutrition will become a bigger challenge. It is vital that we begin to collate this data now at a national level so that we have the knowledge to inform healthcare policies and healthcare planning around this epidemic,” she said.

The initial feedback from the research team, which piloted the measure with adults aged 45 years and older, has been quite positive.

“The next stage of our research will be to test the feasibility of the diet measure on a wider scale,” McEvoy added.



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Modi creating Hindu nationalist state: US billionaire



The 89-year old said the strongest powers — the US, China and Russia — have “remained in the hands of would-be or actual dictators and the ranks of authoritarian rulers continued to grow”.



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Jaydeep Barman is changing India's restaurant business



‘As long as people are eating we will be there,’ Rebel Foods CEO Jaydeep Barman tells Viveat Susan Pinto and Niraj Bhatt.



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December's auto sales back in red



While commercial vehicle (CV) sales were the worst hit, down by 21 per cent to 67,793 units from 85,833 units, two-wheeler sales dropped by 16 per cent to 12,64,169 units from 15,00,545 units. Passenger car sales dropped nine per cent to 215,716 units from 236,586 units.



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IMF lowers India growth estimate to 4.8% for 2019



IMF Chief Economist Gita Gopinath also said the pickup in global growth for 2020 remains highly uncertain as it relies on improved growth outcomes for stressed economies like Argentina, Iran, and Turkey and for under-performing emerging and developing economies such as Brazil, India, and Mexico.



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केदारकांठा: अगर जानवर न बोलते तो आज केदारनाथ मंदिर यहीं होता, जानिए केदारकांठा के बारे में सब कुछ


Kedarkantha Trek: नमस्कार! यह ट्रैवल ब्लॉग भारत की सबसे फेमस विंटर ट्रेक केदारकांठा के बारे में. 5 सीरीज के इस ब्लॉग का ये पहला पार्ट है जिसमें हम आपको केदारकांठा के बारे में बता रहे हैं. दरअसल केदारकंठ जिसे अक्सर केदारकांठा (Kedarkantha) भी कहा जाता है वो हमारे उत्तराखंड में हिमालय की एक पर्वत चोटी है. इसकी ऊँचाई 12,500 फीट है. ये बेहद ही खूबसूरत जगहों में से एक है. खास बात ये है कि केदारकांठा उत्तरकाशी जिले में गोविंद वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है जहां तरह-तरह का खूबसूरती देखनो को मिलती है. काफी दिनों के इंतजार के बाद उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पड़ने वाली इस ‘केदारकांठा ट्रेक’ जाने का अवसर मिला.

भारत की सबसे फेमस विंटर ट्रेक में से एक है. गोविंद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में पड़ने वाली इस ट्रेक की खूबसूरती को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. सर्दियों में देहरादून से मसूरी होते हुए सांकरी गांव तक पहुंचना आसान नहीं है. लेकिन ये बिल्कुल वैसा ही है जैसा हम सोच कर गए थे. दरअसल केदारकांठा ट्रेक सांकरी गांव से शुरू होती है. इसलिए इस ट्रेक पर जाने वाले टूरिस्ट के लिए इस गांव में पहुंचना होता है. इस गांव के बारे में अगले पार्ट में बात करेंगे. फिलहाल अभी केदारकांठा के बारे में बात करते हैं.

केदारकांठा- ‘केदार’ मतलब भगवान शिव और ‘कंठ’ मतलब गला अर्थात भगवान शिव का गला. वैसे तो केदारकांठा को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं लेकिन जिसकी बात सबसे ज्यादा होती है वो ये है कि यह मूल केदारनाथ मंदिर था. दरअसल भगवान शिव हिमालय में रहते थे. पहाड़ों में कई शिव प्राचीन शिव मंदिर हैं और उनका मिथ महाभारत से जुड़ा हुआ है. महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए हिमालय गए. लेकिन भगवान शिव उनसे मिलने नहीं आए. बल्कि उन्होंने भैंस (लोग बैल भी बताते हैं) का भेष धारण किया और पांडवों को गुमराह करने लगे. तभी भैंसों के झुंड को देखकर भीम ने एक चाल चली. वह दो चट्टानों पर पैर फैलाकर खड़े हो गए. सभी भैंस भीम के नीचे से गुजरने लगीं. लेकिन एक भैंस (जिसका रूप शिव जी ने धारण किया हुआ था) ने भीम के पैरों के नीचे से निकलने से मना कर दिया और नतीजा निकला फाइट! इस लड़ाई में, भीम ने भैंस को टुकड़ों में बांट दिया. जिस स्थान पर ये टुकड़े गिरे पांडवों ने बाद में पूजा करने के लिए वहां पर शिव मंदिरों का निर्माण किया.

लोकल किवदंतियों के अनुसार, जब ये मंदिर बन रहा था तो यही असली केदारनाथ मंदिर होने वाला था लेकिन जब मंदिर बन रहा था तभी अचानक गाय की आवाज आ गई. जैसा कि हम सबको पता है कि भगवान शिव शांति में ध्यान लगाते हैं. इसलिए यहां के जानवरों की आवाजों से शांति भंग होने के डर से भगवान शिव वहां से चले गए और केदारनाथ जाकर बस गए. तब तक ये मंदिर भगवान शिव के गले तक बन चुका था इसलिए इसे केदारकंठ या केदारकांठा कहा जाता है. यहां पहुंचने के लिए करीब 12 किलोमीटर की ट्रेक करनी पड़ती है. जोकि तीन से चार दिन में समिट तक पूरी होती है.

तो ये तो थी जानकारी केदारकांठा के बारे में. अगले पार्ट में हम जानेंगे कि वो गांव जहां से केदारकांठा की ट्रेक शुरू होती है वो कैसा है और वहां बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के जीवन
कैसा है? तब तक इसे शेयर कीजिए.



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What brands must do to weather troll-storm



From consulting firms to tech and detergent companies, brands are busy swatting away online crusaders. In the fraught times we live in, it is not just religion that stokes the fires of controversy. In such instances, it may be best to take the trolls head on.



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