लो फैट डाइट का यौन शक्ति पर सीधा असर, शोध में अहम खुलासे



कई लोग फैटी फूड खाने से परहेज करते हैं. उन्‍हें लगता है कि इस भोजन के कारण उनका शरीर बीमारियों का घर बन जाएगा. पर हालिया शोध में सामने आया है कि जो लोग फैट का सेवन नहीं करते, उन्‍हें भी कई तरह की समस्‍याएं होती हैं.

अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जेक फंटस ने अध्ययन में कहा, “हमने पाया कि जिन लोगों ने वसा प्रतिबंधक आहार का पालन किया था, उनमें प्रतिबंधक आहार का पालन नहीं करने वाले पुरुषों की तुलना में सीरम टेस्टोस्टेरोन कम था. हालांकि आहार में सीरम-टी में छोटे अंतर का नैदानिक महत्व स्पष्ट नहीं है.”

जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के लिए शोध टीम ने एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य अध्ययन (राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण परीक्षा सर्वेक्षण, या एनएचएएनईएस) से 3,100 से अधिक पुरुषों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. सभी प्रतिभागियों के पास आहार और सीरम टेस्टोस्टेरोन स्तर पर डेटा उपलब्ध था.

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) द्वारा परिभाषित किया गया कि दो दिवसीय आहार के आधार पर 14.6 फीसदी पुरुषों ने कम वसा वाले आहार के लिए मापदंड पूरे किए.

वहीं अन्य 24.4 फीसदी पुरुषों ने फल, सब्जियों और साबुत अनाज जैसे आहार का सेवन किया. इन लोगों ने पशुओं से प्राप्त होने वाले प्रोटीन और डेयरी उत्पाद का सेवन कम किया.

शोध में शामिल केवल कुछ पुरुषों ने एएचए मानदंडों के साथ कम कार्बोहाइड्रेट आहार लिया, इसलिए इस समूह को विश्लेषण से बाहर रखा गया. शोध के दौरान पुरुषों में औसत सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 435.5 एनजी/डीएल (नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर) था.

अध्ययन के अनुसार, प्रतिबंधात्मक आहार लेने वाले पुरुषों में सीरम टेस्टोस्टेरोन कम मिला, जोकि कम वसा वाले आहार पर 411 एनजी/डीएल पाया गया.

टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है, जो पुरुषों में उनके वृषण में पाया जाता है. यह पुरुषों के अंदर यौन शक्ति को बढ़ाता है और मांसपेशियों व लाल रक्त कोशिकाओं के पर्याप्त स्तर को बनाए रखने के साथ ही यौन कार्यो के लिए भी सहायक होता है.
(एजेंसी से इनपुट)

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Men Don’t Need Intelligence For Success, Says Report



New Delhi: A new research paper published by the Global Institute for Women’s Leadership has revealed that women need to strive more to achieve success than men. Around 20,000 people from 28 countries were surveyed for this, said The Independent.

Though it was mainly a UK-based research, the findings are applicable to around the world.

So, how was the conclusion derived?

“When asked to select one of 14 possible options for the key factors that help women get ahead, people in the UK, US and Australia cited intelligence,” the report said.

In the UK, 26 per cent said that intelligence was the most important factor for women to succeed, while for men the percentage dropped to 17 per cent.

One among 10 Brits thinks that a woman’s appearance is also very important for her success.

“Unfair media portrayals of women were also referenced as a major cause of inequality between the sexes (16 per cent of UK respondents, compared with the global average of nine per cent), along with a lack of women in positions of political power (15 per cent).

Around the globe, men (18 per cent) are twice as likely as women (nine per cent) to claim that gender equality has been achieved in their country,” The Independent report said.



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सेक्स के लिए पहल करने में तीन गुना ज्यादा आगे होते हैं पुरुष, जानिए कारण



लंदनः महिला के मुकाबले पुरुष में सेक्स के लिए पहल करने की प्रवृत्ति तीन गुनी अधिक होती है. यह बात हालिया शोध में कही गई है. यह शोध लंबे समय के लिए पुरुष-महिला यौन संबंधों पर आधारित है. शोध के अनुसार, लंबी अवधि के रिलेशनशिप में लगातार संभोग को कई कारक प्रभावित करते हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा असर रिलेशन में पैशन का होता है.

इवोलुसनरी बिहेवियरल साइंसेस जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, संभोग में कई फैक्टर महत्व रखते हैं. जैसे लोग अपने रिश्ते में कितने खुश हैं. वह अपने साथी के साथ कितना जुड़ाव महसूस करते हैं और वह एक दूसरे से कितना प्यार और कितना विश्वास जताते हैं.

नार्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनटीएनयू) के ट्रोंड विगो ग्रोंटवे का कहना है कि रिश्तों में जोश व जज्बा (पैशन) का होना काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. उन्होंने कहा कि जज्बा ही सभी फैक्टर में सबसे अहम भूमिका निभाता है. इस स्टडी में 19 से 30 उम्र के ऐसे 92 जोड़े शामिल किए गए थे, जोकि एक महीने से लेकर नौ वर्षो तक एक साथ थे. इन जोड़ों ने एक सप्ताह में औसत दो से तीन बार संभोग किया.

एनटीएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर मोंस बेनडिक्सन ने कहा कि स्टडी में साबित हुआ कि दूसरों के प्रति इच्छा जज्बे को कम करती है. उन्होंने कहा कि अपने साथी के अपेक्षाकृत दूसरों के साथ संभोग की अधिक इच्छा भी रिश्ते में जज्बे को कम करती है.

(इनपुट-आईएएनएस)



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महिलाओं का दिमाग क्‍यों चलता है तेज, पुरुष क्‍यों रह जाते हैं पीछे, जानिए कारण



वाशिंगटन: वैज्ञानिकों का दावा है कि महिलाओं का मस्तिष्क उनके हमउम्र पुरुषों की तुलना में तीन साल जवां रहता है. इस वजह से महिलाओं का दिमाग लंबे अरसे तक तेज़ चलता है. इन वैज्ञानिकों में एक भारतीय मूल का है.

अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर मनु गोयल ने कहा कि हमने अभी यह समझना शुरू ही किया है कि कैसे विभिन्न लैंगिग कारक दिमाग के बूढ़े होने की प्रक्रिया पर असर डालते हैं. उन्होंने कहा कि मस्तिष्क की चयापचय संबंधी क्रियाएं महिलाओं और पुरुषों की उम्र बढ़ने पर उनके मस्तिष्क संबंधी अंतरों को समझने में मदद कर सकती हैं. दिमाग शर्करा से चलता है. लेकिन मस्तिष्क शर्करा का इस्तेमाल किस तरह से करता है, इसमें उम्र बढ़ने के साथ परिवर्तन होता है. यह अध्ययन ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है. अनुसंधानकर्ताओं ने 205 लोगों पर अध्ययन किया और पता लगाया कि उनका मस्तिष्क शर्करा का किस तरह से इस्तेमाल करता है.

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इनको किया अध्‍ययन में शामिल
इस अध्ययन में 20 से 84 वर्ष की 121 महिलाओं और 84 पुरुषों ने हिस्सा लिया. उनके मस्तिष्क में ग्लूकोज और ऑक्सीजन के प्रवाह को मापने के लिए उनका पीईटी स्कैन किया गया. इसके बाद उन्होंने उम्र और मस्तिष्क की क्रियाओं के बीच के संबंधों का पता लगाने के लिए एक मशीन में पुरुषों की उम्र और मस्तिष्क क्रियाओं का डेटा डाला.

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महिलाओं से तीन साल बाद वयस्‍क होते हैं पुरुष
अनुसंधानकर्ताओं ने महिलाओं के मस्तिष्क की चयापचय क्रियाओं के डेटा को मशीन में डाला और आंकड़ों से महिलाओं के दिमाग की उम्र की गणना कराई. इसने महिलाओं की वास्तविक उम्र से उनके दिमाग की आयु 3.8 साल जवां बताई. इसी तरह से पुरुषों की दिमाग की आयु निकाली गई. लेकिन यह पुरुषों की वास्तविक उम्र से 2.4 साल ज्यादा थी. गोयल ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पुरुषों का दिमाग तेजी से वृद्ध होता है. दरअसल वे दिमागी तौर पर महिलाओं से तीन साल बाद वयस्क होते हैं.

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घरेलू काम को लेकर बदल रही पुरुषों की सोच, 27 फीसदी लोगों ने मानी यह बात



नई दिल्‍ली: घरेलू काम को लेकर अलग सोच रखने वाले पुरुषों की अब सोच बदल रही है. पिछले तीन सालों में 27 फीसदी पुरुषों की सोच घरेलू काम को लेकर बदल चुकी है. इनका मनाना है कि घरेलू काम सिर्फ महिलाओं और बेटियों का काम नहीं है, इसमें सभी का सहयोग होना चाहिए.

बता दें कि परिवारों में असमानता की वास्‍तविकता का पता लगाने के लिए एक अभियान चलाया गया है. यह अभियान एरियल के मार्फत शेयर दि लीड शीर्षक के तहत चलाया है. साल 2015 में शुरू किए गए इस अभियान में 79 प्रतिशत पुरुषों का मानना था कि घरेलू काम सिर्फ औरतों का है और बाहरी काम पुरुषों का है लेकिन पिछले तीन सालों में पुरुषों की यह सोच बदलने लगी है. 2016 में सिर्फ 63 प्रतिशत ने घरेलू काम के लिए बेटियों को जिम्‍मेदार ठहराया था. साल 2018 में यह संख्‍या घटकर 52 प्रतिशत हो गई है. पुरुष अब धीरे-धीरे मानने लगे हैं कि घरेलू काम में सभी का सहयोग होना चाहिए.

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वीकेंड को लेकर यह बात आई सामने
वक्‍ता ने कहा कि इस अभियान में सिर्फ असमानता की बारीकी ही नहीं पता चल रही हे बल्कि पुरुषों की सोच इस अभियान के चलते बदल रही है. साल 2018 में हुए एक स्‍वतंत्र सर्वे में यह भी बात सामने आई है कि 72 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वीकेंड सिर्फ खरीददारी और घरेलू काम के लिए है जबकि 68 प्रतिशत पुरुषों का मानना है कि वीकेंड सिर्फ विश्राम के लिए है.

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पहल के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा, ऐसे कर रहीं प्यार का इजहार



नई दिल्ली: बदलते दौर में प्यार करने की परिभाषाएं बदल रही हैं और प्यार के इजहार की वह परंपरा भी टूट रही है, जिसमें प्यार में इजहार करने का झंडा सिर्फ पुरुष थामे रखता है. महिलाओं में ऑनलाइन प्यार तलाशने का चलन बढ़ा है, मुखर हो रहीं महिलाएं आगे बढ़कर पुरुषों से प्यार का इजहार करने से भी नहीं हिचकिचा रही हैं.

कुछ बरस पहले तक ऑनलाइन डेटिंग करने वालों को हिकारत भरी नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब यह एक ट्रेंड बन गया है. एक अनुमान के मुताबिक, अब हर पांच में से एक रिलेशनशिप ऑनलाइन शुरू हो रहा है, यह वजह है कि ऑनलाइन डेटिंग एप्स की बाढ़ आ गई है. अमेरिका और यूरोप में स्टैब्लिश कई बड़ी डेटिंग कंपनियां भारत में कारोबार खड़ा कर रही हैं. इसी में से एक है, ‘बम्बल’ जिसमें हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने भी निवेश किया है.

दुनियाभर में ‘बम्बल’ के यूजर्स संख्या 4.5 करोड़ से ज्यादा
‘बम्बल’ डेटिंग एप को महिला प्रधान एप कहा जा रहा है, जिसकी अपनी वजहें हैं. इसका जवाब देते हुए इसकी को-फाउंडर व्हाइटनी वोल्फ कहती हैं, “ऑनलाइन डेटिंग को लेकर खासतौर पर महिलाओं में हमेशा से थोड़ा-सा संशय रहता है. इसलिए भारत में महिला सशक्तीकरण के मोटो के साथ एप को लॉन्च किया गया है.” दुनियाभर में ‘बम्बल’ का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 4.5 करोड़ से अधिक है.

इस एप पर महिलाएं ही सबसे पहले पहल कर सकती हैं
डेटिंग एप अब किस तरह महिला प्रधान हो रहे हैं? इसका जवाब देते हुए नारीवादी गीता यथार्थ कहती हैं, “बम्बल ने डेटिंग एप के क्षेत्र में क्रांति ला दी है. इस डेटिंग एप में महिलाओं की सुरक्षा और कंफर्ट को ध्यान में रखकर कई बेहतरीन फीचर्स तैयार किए गए हैं. मसलन, इस एप पर महिलाएं ही सबसे पहले पहल कर सकती हैं. अगर किसी लड़के को किसी लड़की की प्रोफाइल पसंद भी आ गई तो वह उसे मैसेज नहीं कर पाएगा. फोटो डाउनलोड नहीं कर पाएगा, किसी तरह की ऑनलाइन स्टॉकिंग तो भूल ही जाइए.”

कई और महिला प्रधान डेटिंग एप शुरू हो सकते हैं
गीता कहती हैं, “बम्बल की तरह अब कई और महिला प्रधान डेटिंग एप शुरू हो सकते हैं, क्योंकि अब भारतीय महिलाएं संकोच के आवरण से बाहर निकलकर हर चीजों में हाथ आजमा रही हैं.” ‘टिडर’, ‘जुस्क’, ‘बम्बल’, ‘हैपन’, ‘मैच’, ‘वन्स’, ‘हिज’, ‘हगल’, ‘द लीग’, ‘चैपी’, ‘प्लेंटी ऑफ फिश’, ‘लेस्ली’, जैसी दर्जनभर से अधिक डेटिंग वेबसाइट्स हैं, जहां बड़ी तादाद में महिलाएं प्यार की तलाश में हैं.



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Alert: NHA की चेतावनी, ये लक्षण हों तो पुरुष तुरंत कराएं जांच, हो सकता है प्रोस्टेट कैंसर…


आजकल कैंसर होना आम बात हो चुकी है. हर चौथे या पांचवे व्यक्ति के पास अपनी, रिश्तेदार या दोस्त से जुड़ी कैंसर की कहानी है. ऐसे में इस बीमारी को लेकर एलर्ट होने की आवश्यकता है.

इस बारे में अब नेशनल हेल्थ National Health Service (NHS) ने चेतावनी जारी की है. इसमें बताया गया है कि कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें इग्नोर करना खतरनाक हो सकता है.

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ये लक्षण ऐसे हैं जो कहीं न कहीं कैंसर के शुरुआती चरणों की ओर इशारा करते हैं. तो देर किस बात की, आप भी जानें इनके बारे में.

– जब पेशाब का रंग बदलने लगे. यानी पीले की जगह ये लाल रंग का हो तो जांच कराएं. बदला हुआ रंग डार्क पिंक, लाल या डार्क ब्राउन भी हो सकता है. अगर पुरुषों में ये बदलाव हो तो इसे प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत कहा जा सकता है.
– अगर पेशाब करने में काफी दिक्कत होती हो तो भी जांच कराना जरूरी होता है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं कि कैंसर हो गया है, पर डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

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– यूरीन में खून आ रहा हो तो उसे इग्नोर ना करें. ये गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है. हालांकि लाल रंग का यूरीन, आपके खानपान की वजह से भी आ सकता है.
– कमर और कमर के नीचे के हिस्से में दर्द रहता हो, जो तमाम इलाज के बाद लौटकर आता हो.
– बिना किसी कारण के अचानक से वजन घट रहा हो.

क्यों रहें सतर्क
प्रोस्टेट कैंसर ऐसा कैंसर है जो पुरुषों को जब अपनी चपेट में लेता है तो कई मामलों में सालों तक इसके लक्षण पकड़ में नहीं आते. इसलिए इन बदलावों को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए.

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चल गया पता, आखिर पुरुषों में क्यों कम हो जाती है प्रजनन क्षमता?



जिस तरह से प्रजनन क्षमता घटने से महिलाएं चिंतित होती हैं, उसी तरह से पुरुष भी परेशान होते हैं. अब एक नए शोध में पता चल गया है कि आखिर पुरुषों की प्रजनन क्षमता क्यों कम होती जाती है.

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इसमें बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ये सब होता है. इसका मनुष्य के स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है.

शोध किया है ब्रिटेन में ईस्ट एंग्लिया विश्ववविद्यालय ने. शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्म हवाओं के कीड़े शुक्राणुओं को नष्ट कर देते हैं.

इस शोध की रिपोर्ट को पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया है. अध्ययन का नेतृत्व करने वाले मैट गेज ने कहा, ‘इस शोध में हमने पाया कि जब मौसम गर्म होता है तो शुक्राणु की क्रियाप्रणाली बेहद संवेदनशील होती है. चूंकि प्रजनन और जनसंख्या वृद्धि के लिए शुक्राणु अनिवार्य है तो इन अध्ययनों से यह पता चल सकता है कि जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता को क्यों खतरा है’?

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शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्म हवाओं से नर में शुक्राणुओं की संख्या आधी हो जाती है और यह लगभग उनमें प्रजनन क्षमता खत्म कर देती है. दूसरी ओर मादाओं पर गर्म हवाओं का कोई असर नहीं पड़ा.
(एजेंसी से इनपुट)

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इस वजह से सेक्‍स के बाद उदास हो जाते हैं पुरुष, आता है गुस्‍सा, पहली बार शोध में अहम खुलासे…


नई दिल्‍ली: अक्‍सर ये माना जाता है कि शारीरिक संबंध के दौरान महिलाओं की अपेक्षा पुरुष ज्‍यादा आनंद में रहते हैं. पर एक नए शोध में चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए हैं.

शोध किया गया ऑस्‍ट्रेलिया के क्‍वींसलैंड यूनिवर्सिटी में. शोधकर्ताओं ने बताया कि इस तरह की शिकायत महिलाओं में होने की पहचान पहले ही चुकी है, मगर पुरुषों में ऐसा होता है इसके
बारे में पहले पता नहीं था.

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शोध में कहा गया है कि सेक्स करने के बाद कुछ पुरुषों को बुरा अहसास होता है. ‘जर्नल ऑफ सेक्स और मैरिटल थेरेपी’ में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार, ‘महिलाओं की तरह पुरुष भी पोस्टकॉइटल डिस्फोरिया (पीसीडी) से पीड़ित हो सकते हैं’.

क्‍या है पीसीडी
पीसीडी एक ऐसा विकार है, जिसमें शारीरिक संबंध स्‍थापित करने के बाद उदासी, चिंता, चिड़चिड़ापन और क्रोध की भावना पैदा होती है.

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गौरतलब है कि यह शोध एक ऑनलाइन सर्वेक्षण के द्वारा करवाया गया था. इसमें आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूके, रूस, न्यूजीलैंड, जर्मनी और अन्य देशों के 1,208 पुरुषों को शामिल किया गया था.

शोध के नतीजों के अनुसार, 40 फीसदी लोगों ने अपने जीवन काल में पीसीडी का अहसास होने की बात कबूली. जबकि 20 फीसदी ने चार सप्ताह में ऐसा अहसास किया था.
(एजेंसी से इनपुट)

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More Men go For Plastic Surgery Than Women to Enhance Looks, Study Reveals



If you thought that only women go under the knife for beauty enhancement, think again. According to a study, there has been an increase in cosmetic procedures in men, both young and old, from liposuction, tummy tucks, breast reductions to botox.

The study, released by the American Society of Plastic Surgeons, showed that a lot of young men are looking for body contouring procedures, enhancing their looks and building confidence.

In the past five years, liposuction has seen a 23 per cent rise and tummy tucks have gone up by 12 per cent, while male breast reductions have increased about 30 per cent.

In fact, in the US more than 1.3 million cosmetic procedures were performed on men in 2017 alone.

“More and more men are coming to my office to have an open discussion about their insecurities,” said Lorelei Grunwaldt, a board-certified plastic surgeon in Pittsburgh.

“For a lot of men, just having a procedure on an area of their body that they’re self-conscious about can really make a positive impact on how they see themselves,” Grunwaldt added.

Besides young men, older men are having more minimally-invasive procedures to take years off of their faces.

Nearly 100,000 men had filler injections in 2017, up 99 per cent since 2000, with Botox quadrupling in popularity, the study showed.

“Some people call it the ‘executive edge’ because a lot of patients report that they want to look younger to continue to compete in the workplace,” said Jeffrey Janis, from the American Society of Plastic Surgeons.

“But I think, more often, men just want to look as young as they feel.”



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