Why FM may stick to fiscal deficit target of 3.4%



Budget-makers in North Block are looking to maintain this fiscal status quo, in spite of tax revenues nowhere close to where the government wants and in spite of possible higher expenditure commitments.



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PM-Kisan scheme will bring cheer to most farmers



The scheme, which would give Rs 6,000 to small farmers in a year or Rs 500 a month, will add more money to the account of these cultivators than the money he/she saves every month on an average.



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Govt needs to keep a tight leash on expenditure



The negative aspect about the Budget is that the capital expenditure has been marginally cut to achieve the fiscal deficit target assumptions, and the onus of sustaining investment demand till private capex revives continues to vest with the public sector enterprises, notes Jyotivardhan Jaipuria.



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Piyush Goyal interview: 'Farmers will give response to Mamata'



‘A sum of Rs 6,000 a year is very significant for a small farmer whose land holding is very small and whose produce is very small. All these calculations on a daily basis are extremely unfortunate and an insult to farmers.’



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Arithmetic behind PM's 10 mn job claim is flawed!



The independent institute advising the PM on jobs seems to have missed the point that the challenge is to create net additional jobs, says Mahesh Vyas.



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'रिसॉर्ट सिटी' गए हैं PM मोदी, रूस के सबसे खूबसूरत शहरों में शुमार है सोची…


सोची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के शहर सोची पहुंच चुके हैं. यहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए गए हैं. पर हम आपको बता रहे हैं सोची शहर के बारे में.

सोची रूस का तटीय शहर है. ये ब्‍लैक सी के किनारे बसा है. सोची, रूस और जॉर्जिया के बीच बॉडर की तरह दिखता है. 2010 के आंकड़ों के मुताबिक इस शहर की कुल आबादी 3,43,334 थी. कम आबादी और लंबा शहर बेहद खूबसूरत है. सोची को रूस की ‘रिसॉर्ट सिटी’ भी कहा जाता है.

ये शहर, रूस के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक माना जाता है. यहां हर ओर हरियाली है. कई बीच हैं, जो गर्मी के मौसम में लोगों से भरे रहते हैं. यहां के पहाड़ों पर लोग स्‍कीइंग करते हैं. यहां काफी पुराने रिसॉर्ट हैं.

सोची जाने के लिए मई के महीने को काफी अच्‍छा माना जाता है. इस समय यहां का तापमान काफी अच्‍छा होता है. ना सर्दी होती और ना ही गर्मी.  यहां की एयर क्‍वालिटी भी बहुत अच्‍छी है. यहां 5 लाख एकड़ जंगल हैं. काफी सारे खूबसूरत पार्क हैं.

गर्मियों के समय में बड़ी संख्‍या में लोग सोची जाते हैं. यहां ज्‍यादातर टूरिस्‍ट घूमते दिखते हैं. यहां के खास जगहों पर स्‍काई रिसॉर्ट, सोच्चि पार्क, एक्‍वापार्क एंफीबियस, बायोस्‍फेयर रिजर्व, पाक्र रिवेरा, सोच्चि ऑडिटोरियम प्रमुख हैं.

Narendra Modi reaches Russia's Sochi for an summit with President Vladimir Putin

क्‍यों गए हैं मोदी
खबरों के मुताबिक, पीएम मोदी की अनौपचारिक वार्ता का लक्ष्य, दोनों देशों के बीच आपसी दोस्ती एवं विश्वास के बूते महत्वपूर्ण वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा राय बनाना है.

बता दें कि मोदी ने कल ट्वीट किया था, ‘रूस के मित्रवत लोगों को नमस्कार! मैं सोची के कल के अपने दौरे और राष्ट्रपति पुतिन के साथ अपनी मुलाकात के प्रति आशान्वित हूं. उनसे मिलना मेरे लिये हमेशा सुखदायी रहा है’. उन्होंने लिखा, ‘मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार युक्त रणनीतिक भागीदारी और अधिक मजबूत होगी’.





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'गुच्‍छी' खाकर हर तरह की गाली झेल जाते हैं मोदी, नहीं पड़ता सेहत पर फर्क…


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन के एक कार्यक्रम ‘भारत की बात सब के साथ’ में कहा कि वे पिछले 20 साल से हर दिन एक चीज खा रहे हैं और वह है गालियां. मैं हर दिन एक से दो किलो गालियां खाता हूं.

मोदी ने इन गालियों को ही अपने फिट रहने का राज बताया. पर क्‍या आप जानते हैं कि असल में मोदी के फिट रहने का राज क्‍या है. वो ऐसा क्‍या खाते हैं जो इतने उर्जावान हैं.

दरअसल, गुजरात विधानसभा चुनावों में ये बात उठी थी कि मोदी महंगे मशरूम खाते हैं. खुद मोदी ने भी बतौर गुजरात के मुख्‍यमंत्री कहा था कि वे हिमाचल का मशरूम खाते हैं और यही उनकी सेहत का राज है.

हिमाचल के उस मशरूम को ‘गुच्‍छी’ कहा जाता है. गुच्‍छी केवल प्राकृतिक तरीके से ही मिलता है. यानी इसकी खेती नहीं की जाती. यही वजह है कि ये काफी कम मिलता है और महंगा बिकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुच्‍छी की कीमत 30 हजार रुपए प्रति किलो तक होती है. इसलिए आम आदमी का इसे खरीद पाना बेहद मुश्किल है. इस मशरूम में कई तरह के विटामिन और पोषक तत्‍व पाए जाते हैं. अगर कोई इसे लगातार खाए तो उसे दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं कम होती हैं.

mushroom

गुच्‍छी की ही तरह मशरूम है यूरोपियन ट्रफल. इसे आम तौर पर मशरूम कहा जाता है मगर यह मशरूम नहीं होता. इसमें एक खास महक होती है. यह 7 से 8 लाख रुपए प्रति किलो तक बिकता है. यह मध्रुम की तरह पकाया नहीं जाता बल्कि इसे श्रेड कर खाने के ऊपर डाला जाता है. यह एक प्रकार का फंगस होता है. ये सैकड़ों साल पुराने ओक के पेड़ की जड़ों के पास पाए जाते हैं.



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