Azim Premji loosens purse strings further for philanthropy



With the latest action, the value of the philanthropic endowment corpus contributed by Premji is about $21 billion, which includes 67 per cent of the economic ownership of Wipro.



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PM-Kisan scheme will bring cheer to most farmers



The scheme, which would give Rs 6,000 to small farmers in a year or Rs 500 a month, will add more money to the account of these cultivators than the money he/she saves every month on an average.



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साल 2019 में दबे पांव आ रही है यह बीमारी, राजस्थान में मरीजों की तादाद सबसे ज्यादा



नई दिल्ली: पिछले कुछ बरसों से स्वाइन फ्लू की दस्तक स्वास्थ्य सेवाओं को चौकन्ना कर देती है. पिछले दो बरस में तीन हजार से ज्यादा लोगों की जान लेने वाली यह खतरनाक बीमारी इस साल भी दबे पांव चली आ रही है और जनवरी के पहले तीन हफ्ते में देशभर में इसके 2777 मामले सामने आए हैं और कुल 85 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें अकेले राजस्थान में मरीजों की तादाद 1233 है और मरने वालों का आंकड़ा 49 तक पहुंच चुका है.

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स्वाइन फ्लू का प्रकोप राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में बढ़ रहा है. दिल्ली में 20 जनवरी तक इसके कुल 229 मामले दर्ज किए गए. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समेकित रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में इसके मरीजों और मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि उसके बाद पंजाब का स्थान है, जहां 90 लोग इसकी चपेट में आए और नौ की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना में भी बीमारी की आमद दर्ज की गई है.

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ऐसे फैलती है यह बीमारी
सुअरों के श्वसन तंत्र से निकले वायरस के कारण होने वाली यह बीमारी बेहद संक्रामक है. हालांकि सामान्य अवस्था में यह बीमारी सुअरों से मनुष्यों में नहीं फैलती, लेकिन सूअर पालने वाले और उनके साथ काम करने वाले मनुष्यों में इसके संक्रमण की आशंका रहती है. इसके अलावा मांसाहार करने वाले लोग अगर संक्रामक मांस को अच्छी तरह पकाए बिना उसका सेवन कर लें तो उनमें बीमारी होने का जोखिम बढ़ जाता है और दूसरों में भी इसके संक्रमण का खतरा रहता है.

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बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोग हों जागरूक
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के रेस्परेटरी मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डाक्टर ज्ञानदीप मंगल का कहना है कि इस घातक बीमारी पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है, अन्यथा यह एक राष्ट्रीय बोझ बन सकती है. वह बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने के साथ ही इसकी चपेट में आने वालों के उचित उपचार और उसके आसपास के लोगों को इसके संक्रमण में आने से बचने के लिए पर्याप्त उपाय करने की हिदायत देते हैं.

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बच्‍चों, महिलाओं व डायबिटीज मरीजों को ज्‍यादा खतरा
उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज और दिल की बीमारी से मरीजों के इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य लोगों की तुलना में कमजोर होती है. वह सलाह देते हैं कि बीमारी की पहचान कर तत्काल इसका उपचार शुरू करना चाहिए अन्यथा मरीज की मृत्यु भी हो सकती है.

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इन बातों का रखें ख्‍याल
नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल गुरुग्राम के सीनियर आहार विशेषज्ञ परमीत कौर के अनुसार उचित आहार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और स्वाइन फ्लू होने की स्थिति में भी सफाई और उपचार के साथ ही आहार पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि एच1एन1 वायरस की चपेट में आने वाले मरीजों के उपचार के लिए तमाम जरूरी एहतियात बरते जाते हैं. बीमारी से संक्रमित लोगों के उपचार के लिए लगभग हर अस्पताल में एक अलग स्वाइन फ्लू वार्ड की व्यवस्था की जाती है ताकि अस्पताल के अन्य मरीजों और स्टाफ को इस बीमारी के संक्रमण से बचाया जा सके.

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बीमारी का पता चलते ही कराएं इलाज
धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल के डाक्टर गौरव जैन बताते है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण महसूस होने पर तत्काल टेस्ट कराना चाहिए और यदि टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आए तो देर किए बिना इलाज किया जाता है. ऐसे में एंटीवायरल दवा देने से मरीज़ को तत्काल राहत मिलती है और कुछ समय के लिए बीमारी की तीव्रता कम हो जाती है. आईडीएसपी के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 14,992 लोग स्वाइन फ्लू के वायरस के शिकार हुए और इनमें से 1,103 की मौत हो गई. उससे पिछले बरस इसका प्रकोप ज्यादा रहा और कुल 38,811 मरीजों में 2,270 को बचाया नहीं जा सका. इस साल भी यह बीमारी दबे पांव चली आ रही है और स्वास्थ्य एजेंसियां इसपर नियंत्रण के तमाम उपाय कर रही हैं.

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उत्‍तराखंड में भी स्वाइन फ्लू का अटैक, जानिए इसके लक्षण व बचाव का तरीका



नई दिल्‍ली: राजस्‍थान में स्वाइन फ्लू से कई लोगों की मौत का सिलसिला अभी खत्‍म भी नहीं हुआ था कि उत्‍तराखंड में भी स्वाइन फ्लू से कई लोगों के मरने की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में सभी को जरूरत है कि स्वाइन फ्लू के बारे में जागरूक रहने और इसके सही समय पर इलाज कराने की. तो आइए जानतें है कि आखिर क्या है स्वाइन फ्लू और कैसे करने इससे बचाव.

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स्वाइन फ्लू है क्‍या
स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है जो इंफ्लूएंजा नामक वायरस की वजह से होता है. स्वाइन फ्लू फैलने का कारण एच1एन1 वायरस होता है जो पक्षियों और मनुष्यों से फैलने वाले फ्लू की तरह होता है. स्वाइन फ्लू के लक्षण कुछ अलग नहीं होते हैं. इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे सिरदर्द, शरीर में दर्द, खांसी-जुकाम, थकावट, बुखार और गले में दर्द की तरह होते हैं. इससे खुद को बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरुरी होती हैं. इन सावधानियों को अपनाकर आप खुद को स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने से बचा सकते हैं. तो आइए आपको इन सावधानियों के बारे में बताते हैं.

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भीड़ वाली जगह में जाने से बचें
भीड़ वाली जगह पर जाने से स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. इसलिए भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें और अगर आप जा भी रहे हैं तो मास्क पहनकर रहें.

खांसते समय मुंह पर हाथ रखें
खांसने से दूसरे व्यक्ति में कीटाणु बहुत जल्दी ट्रांसफर हो जाते हैं. स्वाइन फ्लू बहुत जल्दी फैलने वाला फ्लू है. इसलिए अगर कोई खांस रहा हो तो या आप खांस रहे हैं तो अपने मुंह पर हाथ रख लें ताकि यह इंफेक्शन किसी और को ना फैले.

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मास्क पहनकर रहें
बाहर जाने पर मास्क पहनकर रखें. क्योंकि धूल-मिट्टी के साथ आप स्वाइन फ्लू के वायरस के संपर्क में आ सकते हैं. इसके लिए अच्छे मास्क का इस्तेमाल करें. अगर आपके पास मास्क नहीं है तो रुमाल को 2-3 तय करके मुंह और नाक को ढकें. इससे वायरस आपको प्रभावित नहीं करेगा.

हाथ साफ रखें
स्वाइन फ्लू के इंफेक्शन से बचने के लिए किसी भी चीज को छूने के बाद हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें या हाथों को धो लें. इससे आपके हाथ साफ रहेंगे और वायरस के संपर्क में आने से बचेगें.

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डॉक्टर से परामर्श लें
अगर आपको स्वाइन फ्लू के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें. स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने पर तेज बुखार, शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं.अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखें तो डॉक्टर से परामर्श करें.

क्या हैं इसके लक्षण
फ्लू के गंभीर होने पर व्यक्ति को लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ से फेफड़े प्रभावित होते हैं. जिससे रोगी निमोनिया का शिकार हो जाता है और उसका ब्लड प्रेशर कम होने लगता है. लेकिन यदि कफ, सांस लेने में दिक्कत व बुखार तीनों एक साथ हों तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं.

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