World Kidney Day 2019: पहले बहनों ने दी, तीसरी बार पति ने किडनी दे कराया ट्रांसप्‍लांट, पढ़ें दिल को छू लेने वाली कहानी…


राष्ट्रीय राजधानी के एक अस्पताल में 45 वर्षीय महिला एतिका कालरा का तीसरी बार सफल गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लान्ट) हुआ. महिला के पति ने अपनी किडनी देकर उसकी जान बचाई. चिकित्सकों ने इस बात की जानकारी दी.

इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के जनरल सर्जरी, जीआई सर्जरी एवं ट्रांसप्लान्टेशन के सीनियर कन्सलटेन्ट डॉ. (प्रोफेसर) संदीप गुलेरिया (पद्मश्री विजेता) और उनकी टीम ने इस मुश्किल ट्रंसप्लान्ट को सफलतापूर्वक किया.

सर्जरी के बारे में बताते हुए डॉ. संदीप गुलेरिया ने कहा, ‘1996 में जब महिला 23 साल की थी और हाल ही में उनकी शादी हुई थी, तभी एक नियमित जांच में पता चला कि उनके गुर्दे सिकुड़ रहे हैं. जांच करने पर पता चला कि वे ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस से पीड़ित हैं, इसमें किडनी का खून छानने वाले अंग खराब हो जाते है. तभी से महिला इस बीमारी से लड़ रही हैं’.

उन्होंने कहा, ‘पहले तो उन्होंने आयुर्वेदिक तरीकों से इलाज करवाया, लेकिन उन्हें बिल्कुल आराम नहीं मिला. उनके खून में क्रिएटिनाईन का स्तर लगातार बढ़ रहा था. दिसम्बर 2000 में उनके गुर्दों ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया और उन्हें नियमित डायलिसिस शुरू करना पड़ा. 2001 में उन्होंने पहली बार किडनी ट्रांसप्लान्ट करवाया. उस समय उनकी बड़ी बहन अंशु वालिया ने उन्हें अपनी किडनी दान में दी थी. एक दशक तक यह किडनी ठीक से काम करती रही, लेकिन डोनेट किए गए अंग की लाइफ सीमित होती है, 2014 में उन्हें फिर से समस्या होने लगी’.

डॉ. संदीप गुलेरिया ने कहा कि जांच करने पर पता चला कि उनकी पहली किडनी ने काम करना बंद कर दिया था और अब हम उन्हें डायलिसिस पर भी नहीं रख सकते थे. उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी. हमने फिर से ट्रांसप्लान्ट करने का फैसला लिया. अब उनकी दूसरी बहन रितु पाहवा ने उन्हें किडनी डोनेट की.

डॉ. गुलेरिया ने ऑपरेशन में आई अप्रत्याशित जटिलताओं पर बात करते हुए कहा, ‘दूसरे ट्रांसप्लांट के कुछ ही दिनों बाद, जब महिला आईसीयू में थीं तब उन्हें तेज पेट दर्द की शिकायत हुई. जांच करने पर पता चला कि उनकी आंत (इंटेस्टाईन) में गैंग्रीन हो गया था. हमें तुरंत उनकी जान बचाने के लिए मेजर सर्जरी करनी पड़ी और यह सब तब हुआ जब वह दूसरे किडनी ट्रांसप्लांट के बाद धीरे-धीरे ठीक हो रही थीं’.

दुर्भाग्य से दूसरी किडनी भी सिर्फ चार साल तक चली, जिसके बाद इसने भी काम करना बंद कर दिया.

उन्होंने बताया, ‘यह ट्रांसप्लान्ट किए गए अंग के लिए एक्यूट एंटीबॉडी रिजेक्शन का मामला था, जिसमें महिला के खुद के इम्यून सिस्टम ने किडनी को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. इस समय हमारे पास दो ही विकल्प थे, या तो फिर से किडनी ट्रांसप्लान्ट किया जाए या उन्हें शेष जीवन के लिए डायलिसिस पर रखा जाए. इस बार उनके पति, तरुण ने उन्हें अपनी किडनी देने का फैसला लिया’.

डॉ. गुलेरिया ने बताया, ‘हमने परिवार को सर्जरी के संभावी जोखिमों के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद परिजनों ने किडनी ट्रांसप्लान्ट के लिए सहमति दे दी. लेकिन दोनों का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हुआ, एबीओ इन्कम्पेटिबिलिटी के लिए हमें कई बार प्लाज्मा एक्सचेंज करना पड़ा. पहले दो ट्रांसप्लान्ट्स में लगभग तीन घंटे लगे थे, लेकिन तीसरे ट्रांस्प्लान्ट में साढ़े पांच घंटे लगे, क्योंकि यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था. हालांकि सभी मुश्किलों के बावजूद हमने तीसरी बार उनका सफल किडनी ट्रांसप्लान्ट किया.
मरीज अब ठीक हैं और दूसरे लोगों को भी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं’.

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World Kidney Day 2019: क्रोनिक किडनी डिसीज की जद में आ रहे भारतीय, जानें इसके बारे में सब कुछ…


जीवनशैली की बीमारियों के प्रसार के साथ भारत में Chronic kidney disease (CKD) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी क्रोनिक किडनी रोगों के बढ़ते जोखिम का एक कारक है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सीकेडी की बढ़ती घटनाओं के साथ भारत में डायलिसिस से गुजरने वाले रोगियों की संख्या में भी हर साल 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है. इस प्रतिशत में कई बच्चे भी शामिल हैं.

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दुर्भाग्य से, लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद, गुर्दे की बीमारी को अभी भी भारत में उच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती है. सीकेडी के उपचार और प्रबंधन का आर्थिक कारक भी रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है.

आकाश हेल्थकेयर में नेफ्रोलॉजी और रीनल प्रत्यारोपण के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉ उमेश गुप्ता ने कहा, ‘सीकेडी लाइलाज और बढ़ने वाली बीमारी है, जो समय के साथ गुर्दे के कार्य को कम करता है और रोगी को आजीवन देखभाल और चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है. गुर्दे लाखों छोटी संरचनाओं से बने होते हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है जो रक्त को फिल्टर करते हैं. अगर ये नेफ्रॉन क्षतिग्रस्त हो गए, तो यह गुर्दे के कामकाज को प्रभावित कर सकता है, जिससे गुर्दे की बीमारी भी हो सकती है’.

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उन्होंने कहा, ‘किडनी की बीमारी का कोई लक्षण नहीं है, यह मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप और मधुमेह वाले लोगों को प्रभावित करता है जो बहुत आम है. कुछ असामान्य लक्षण सूजन, संक्रमण (पायलोनेफ्राइटिस), मूत्र प्रणाली में रुकावट, और दर्द निवारक दवाओं (एनएसएआईडी) का अधिकतम सेवन है. जो लोग व्यस्त कार्यक्रम रखते हैं और उचित संतुलित आहार नहीं लेते हैं, उनमें गुर्दे की बीमारी होने का खतरा अधिक होता है’.

डॉ. गुप्ता ने कहा, ‘जो लोग अपनी फिटनेस के बारे में अधिक जागरूक हैं और एक आकर्षक और मांसपेशियों वाले शरीर को पाने के लिए फिटनेस की खुराक लेते हैं, उन्हें भी जोखिम होता है और ये समय के साथ क्रोनिक किडनी रोग की ओर ले जा सकते हैं’.

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और हेल्थकेयर एटहोम (एचसीएएच) के मुख्य परिचालन अधिकारी डॉ. गौरव ठुकराल कहते हैं, ‘अध्ययनों ने भारत में सीकेडी के बोझ को हर दस लाख लोगों के लिए 800 से अधिक आंका है जो कि हमारी आबादी को देखते हुए एक महत्वपूर्ण संख्या है. सीकेडी का उपचार और प्रबंधन एक लंबी प्रक्रिया है जिससे रोगियों और उनके परिवारों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी होती है’.

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डॉ. गौरव ठुकराल ने कहा, ‘इस असुविधा को कम करने के लिए क्वालिटी होम हेल्थकेयर समाधान प्रयासरत हैं. वे एक व्यापक स्वास्थ्य शिक्षा योजना प्रदान करते हैं. वे सीकेडी रोगियों के लिए एक विशेष देखभाल योजना विकसित करते हैं. वे सुनिश्चित करते हैं कि रोगी एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें. यह सब रोगी के घर पर उपलब्ध कराया जाता है’.

उन्होंने कहा, ‘होम हेल्थकेयर समाधान मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक अधिक सुविधाजनक और लागत प्रभावी विकल्प है. उदाहरण के लिए, एचसीएएच 30 फीसदी कम लागत पर उन्हीं के घर में रोगियों को अस्पताल जैसी पेरिटोनियल डायलिसिस प्रदान करता है और डायलिसिस के लिए अस्पताल में रोगियों के लिए द्वि-साप्ताहिक यात्राओं को समाप्त करके देखभाल करने वालों के तनाव को कम करता है’.

डॉ. गौरव ने कहा कि होम हेल्थकेयर वास्तव में भारत के सीकेडी बोझ के प्रबंधन के लिए एक तत्काल, लागत प्रभावी, आरामदायक और उच्च-गुणवत्ता वाला समाधान है.

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World Kidney Day 2019: 6 Ayurvedic remedies for healthy kidneys



A healthy diet, drinking adequate water, exercising, keeping obesity in check, refraining from habits like smoking and drinking are all measures that are excellent for your kidney’s health. Ayurveda offers some natural remedies to help the kidneys do their work well – flushing out toxins, maintaining the electrolyte balance, regulating blood glucose levels and keeping the urinary tract clean. According to Ayurveda, kidney problems happen as a result of an imbalance in the pitta levels in the body. On World Kidney Day 2019, give nature a chance to treat problems related to your kidneys. Consult with an Ayurveda practitioner before using any Ayurveda remedies for your kidneys.

Mulethi or liquorice: This sweet root is a powerful herb that helps your kidneys function well. Liquorice has saponins, flavonoids, xenoestrogens and chalcones that help contract inflammation, increase immunity, beat bacterial infections, reduce gastric secretions, protect from free radical damage and also provide your body with antioxidants. You could add liquorice in its powdered form or add it to your herbal teas.

Cranberries: Cranberries are one of the most effective remedies for dealing with kidney-related infections. Thanks to the presence of antioxidants in them, cranberries can help you fight and prevent infections like Urinary Tract Infections. Cranberries have the ability to fend off E coli bacterial infections that can stick to your urinary tract walls and can also help your kidneys eliminate toxins more effectively. Try having fresh cranberries or natural cranberry juice to reap its benefits.

Gokharu or puncture vine:  This is popularly prescribed for Urinary Tract Infections, kidney stones and many other kidney disorders because it has antiseptic properties and anti-inflammatory properties. This Ayurveda herb is used in Ayurvedic medicine formulations.

Pomegranates or anar:  Pomegranate is often prescribed to those who suffer frequently from urinary tract infections and kidney infections. Pomegranates have Vitamin C and antioxidants that could be useful in regulating kidney functions. Eat pomegranate or have its juice to avail of all its health benefits.

Banyan tree bark: Commonly prescribed for urine infections, banyan tree bark is given to patients by Ayurveda practitioners in the form of capsules. This can also help treat pelvic inflammatory infections and vaginitis.

Lemons: Its acidic nature and the high level of Vitamin C content in lemons can help prevent the formation of kidney stones. A squeeze of lemon juice on your dishes or drinking lemon juice frequently can help flush out toxins from your body.

 

 



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World Kidney Day 2019: हर साल किडनी के लाखों नए मरीज रजिस्‍टर्ड, जानें कारण, लक्षण और बचाव…


देश में औसतन 14 प्रतिशत महिलाएं एवं 12 प्रतिशत पुरुष किडनी की समस्या से पीड़ित हैं. भारत में हर साल दो लाख लोगों को किडनी रोग हो जाता है. शुरुआती स्टेज में इस बीमारी को पकड़ पाना मुश्किल है, क्योंकि दोनों किडनी 60 प्रतिशत खराब होने के बाद ही मरीज को इसका पता चल पाता है. यही वजह है कि हर साल विश्‍व किडनी दिवस मनाया जाता है. साल 2019 की थीम ‘किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरीवेयर’ रखी गई है.

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बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया, ‘देश में औसतन 14 प्रतिशत महिलाएं एवं 12 प्रतिशत पुरुष किडनी की समस्या से पीड़ित हैं. विश्व में 19.5 करोड़ महिलाएं किडनी की समस्या से पीड़ित है. भारत में भी यह संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है, यहां हर साल दो लाख लोगों को किडनी रोग हो जाता है. किडनी के खराब होने के कारण ही शरीर में खून का क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है, खून में पाए जाने वाले खराब तत्व कोक्रिएटनिन कहते है’.

कारण
किडनी के खराब होने के कारणों के बारे में बताते हुए डॉ. राजेश ने कहा कि आमतौर पर मूत्र मार्ग में संक्रमण और प्रतिकूल गर्भावस्था परिणाम के कारण महिलाओं को गंभीर किडनी रोग हो जाता है. किडनी के खराब होने के निम्न कारण हैं, जैसे कम मात्रा में पानी पीना, अधिक मात्रा में नमक खाना, दर्दनाशक दवाओं का अधिक सेवन करना, अधिक शराब पीना, मांस का अधिक सेवन करना, धूम्रपान करना और अधिक सॉफ्ट-ड्रिक्स पीना.

लक्षण
वहीं किडनी खराब होने के लक्षणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ‘लगातार उल्टी आना, भूख ना लगना, थकान और कमजोरी महसूस होना, पेशाब की मात्रा कम होना, खुजली की समस्या होना, नींद ना आना और मांसपेशियों में खिंचाव होना किडनी खराब होने का कारण है’.

उपचार
उपचार के बारे में बताते हुए डॉ. राजेश अग्रवाल ने कहा कि जब किडनी ज्यादा खराब ना हुई हो, उस स्थिति में प्राथमिक उपचार के बाद दवा और भोजन में परहेज द्वारा इलाज किया जाता है. यह उपचार किडनी को ठीक करने में काफी मददगार होता है, इसमें ज्यादा खर्च की जरूरत नहीं पड़ती है. दोनों किडनी के खराब होने की वजह से जब किडनी के कार्य करने की क्षमता में कमी आ जाती है, तब डायालिसिस द्वारा इलाज की जरूरत होती है. इसके अलावा कई मरीज किडनी ट्रांसप्लांट कराकर भी अपना उपचार करा सकते हैं.

डॉक्‍टर्स की राय
गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट डॉ. सुदीप सिंह सचदेव ने किडनी खराब होने से बचाव के उपायों के बारे में बताते हुए कहा, ‘किडनी हमारे शरीर में खून को साफ कर ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है. किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति को परेशानी महसूस होने पर तुरन्त उपचार कराना चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए. समय-समय पर ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच करानी चाहिए. ब्लड प्रेशर या डायबीटीज के लक्षण मिलने पर हर छह महीने में पेशाब और खून की जांच कराना चाहिए’.

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उन्होंने कहा, ‘न्यूट्रिशन से भरपूर भोजन, नियमित एक्सरसाइज और वजन पर कंट्रोल रखने से भी किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है. पेनकिलर दवाओं का कम मात्रा में इस्तेमाल, अधिक मात्रा में तरल पदार्थो का सेवन करना, नमक का इस्तेमाल कम करना और धूम्रपान न करना से किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है. इसके साथ ही हाई रिस्क वाले लोगों को किडनी फंक्शन की जांच नियमित रूप से कराते रहना चाहिए’.

धर्मशिला नारायाणा सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल की डारेक्टर एंड सिनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी डॉक्टर सुमन लता ने कहा, ‘यह समय हमें अपने स्वास्थ पर कंट्रोल करने का है. हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़कर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए. अधिक मात्रा में दर्द निवारक और काउंटर दवाओं के सेवन से बचना चाहिए. हम इस बात में विश्वास करते हैं कि निवारण, इलाज से बेहतर है’.

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World Kidney Day 2019: 6 tips you need to follow to keep your kidneys healthy



World Kidney Day, observed on March 14 every year, is a day dedicated to spreading awareness about health issues afflicting one of the most vital organs in our body. Kidneys essentially filter toxins from our body. They also play an important role in maintaining the good functioning of the urinary system. When your kidneys are affected and when they stop functioning properly, you could suffer from a number of conditions like chronic kidney disease and acute kidney failure, among other kidney complications. Did you know that Chronic Kidney Disease is one of the major reasons for mortality among people over 30 years of age, according to the World Health Organisation (WHO)? Kidney complications have scarily common among today’s youth. It is important to keep in mind a few pointers when it comes to keeping your kidneys healthy. You must make sure you follow these tips right from a young age to avoid complications in the future.

Cut down sugar and salt intake: Reducing sodium and sugar in your diet is going to be excellent for your kidneys. This will help maintain blood sugar and blood pressure, both of which are vital to keep diseases like obesity and diabetes, some of the important risk factors for kidney diseases, at bay.

Eat right: Certain kidney-friendly foods must feature in your daily diet. This includes fresh vegetables and fruits, green leafy vegetables, herbs, spices which have the ability to prevent and stop the progression of kidney diseases. You need to up your intake of healthy foods like whole grains, legumes, dals, fish, nuts and other sources of nutrients too.

Hydrate regularly: One of the most important ways to keep kidney complications away is to ensure you drink plenty of water. Water ensures you eliminate toxins from your body at regular intervals and helps detoxify your body. Lack of water could cause painful conditions like kidney stones.

Indulge in physical activity: Any kind of exercise will ensure that you get your blood pumping and your heart rate up. This will regulate your weight, keep obesity away and maintain your BMI. All of these will ensure that your kidneys stay healthy.

Schedule health checkups: Before dreaded diseases sneak up on you, make sure you get your health checkups done regularly to know if you are at risk of lifestyle diseases. Timely checkups and consultation with your doctor can help prevent kidney diseases. Intervention at early stages is key to preventing kidney complications in the future.

Stop smoking and reduce your alcohol intake: Tobacco consumption and excess alcohol intake are some of the sure shot ways to get kidney diseases. Both alcohol and smoking can increase the number of toxins in your body and hamper the proper functioning of your kidneys and other organs. Cutting down on both these will help restore your kidneys to good health.

 



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World Kidney Day 2019: ये देसी पौधा किडनी के लिए है रामबाण, जानें फायदे…



विश्‍व किडनी दिवस (World Kidney Day 2019) 14 मार्च को मनाया जाएगा. इस मौके पर भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अनोखे देसी पौधे से दवा विकसित करने में कामयाबी हासिल की है.

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दावा है कि इस दवा के प्रयोग से बीमार किडनी भी फिर से स्‍वस्‍थ हो सकती है. ये दवा जिस पौधे को प्रयोग कर बनाई गई है, उसका नाम है पुनर्नवा पौधा.

आयुर्वेद में भी पुनर्नवा पौधे के गुणों के बारे में बताया गया है. इन्‍हीं का अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने दवा विकसित की है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इस दवा के इस्‍तेमाल से गुर्दे की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं फिर से स्वस्थ्य हो सकती हैं. साथ ही संक्रमण की आशंका भी इस दवा से कई गुना कम हो जाती है.

हाल ही में पुस्तिका ‘इंडो-अमेरिकन जर्नल ऑफ फॉर्मास्युटिकल रिसर्च’ में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, ‘पुनर्नवा में गोखुरू, वरुण, पत्थरपूरा, पाषाणभेद, कमल ककड़ी जैसी बूटियों को मिलाकर बनाई गई दवा ‘नीरी केएफटी’ गुर्दे में क्रिएटिनिन, यूरिया व प्रोटीन को नियंत्रित करती है. क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को स्वस्थ्य करने के अलावा यह हीमोग्लोबिन भी बढ़ाती है. नीरी केएफटी के सफल परिणाम भी देखे जा रहे हैं’.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रोफेसर डॉ. के.एन. द्विवेदी का कहना है कि रोग की पहचान समय पर हो जाने पर गुर्दे को बचाया जा सकता है. कुछ समय पहले बीएचयू में हुए शोध से पता चला है कि गुर्दा संबंधी रोगों में नीरी केएफटी कारगार साबित हुई है.

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के किडनी विशेषज्ञ डॉ. मनीष मलिक का कहना है कि देश में लंबे समय से गुर्दा विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है. ऐसे में डॉक्टरों को एलोपैथी के ढांचे से निकलकर आयुर्वेद जैसी वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए. आयुर्वेदिक दवा से अगर किसी को फायदा हो रहा है तो डॉक्टरों को उसे भी अपनाना चाहिए.

आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते माह केंद्र सरकार ने आयुष मंत्रालय को देशभर में 12,500 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना करने की जिम्मेदारी सौंपी है. इन केंद्रों पर आयुष पद्धति के जरिए उपचार किया जाएगा. यहां वर्ष 2021 तक किडनी की न सिर्फ जांच, बल्कि नीरी केएफटी जैसी दवाओं से उपचार भी दिया जाएगा.

उन्होंने यह भी बताया कि गुर्दा की बीमारी की पहचान के लिए होने वाली जांच को सभी व्यक्तियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि मरीजों को शुरुआती चरण में ही उपचार दिलवाया जा सके.
(एजेंसी से इनपुट)

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World Kidney Day: Dr Hemal Shah Answers Top Questions About Chronic Kidney Diseases



World Kidney Day is celebrated on the second Thursday in the month of March every year and this year it falls on March 8.  It is observed to inform people about kidney and its importance. To create awareness about the function of kidney and kidney diseases, many events and arranged on this day. Chronic Kidney Disease or CKD is a serious kidney disease in which your kidney loses the ability to function gradually. In India, it is becoming one of the main causes of death. So, on World Kidney Day, we share with you some FAQs answered by Dr Hemal Shah, Senior Nephrologist & Secretary of Amar Gandhi Foundation. (ALSO READ World Kidney Day 2018: Dr Partap Chauhan on Why Ayurveda Should be the First Choice for Chronic Kidney Disease).

Is CKD more common in women than men? Why?

Diabetes and blood pressure are common amongst Indians. This puts women at risk just like men. However, the detection of these risk factors is late in most women. Women in India have an increased risk of Chronic kidney diseases (CKD) from repeated urinary tract infection (UTI). Women delay voiding because of the lack of toilets and unhygienic conditions of the toilets is also a risk factor. Repeated such attacks of UTI leave scars on the kidney which leads to CKD.

Which factors increase the risks of CKD?

Diabetes / Hypertension and UTI.

Additionally, women are at risk for systemic lupus erythromatousus (SLE). This is an autoimmune disorder. The incidence of SLE is rising due to exposure to environmental toxins including those ingested through food and water. (ALSO READ World Kidney Day 2018: Ek Chammach Kam Campaign to Launch on World Kidney Day to Limit Salt Intake).

What are the causes of chronic kidney diseases in women and tips to prevent it?

Early detection of diabetes and Blood pressure through checkup can help. Amar Gandhi Foundation is running a free checkup campaign along with Suburban Diagnostics. Early and adequate treatment of diseases like UTI and SLE amongst others will help prevent CKD.

Can you prevent the disease? How?

A urine test that can detect CKD early should be carried out by patients at risk. So all Diabetes, Blood pressure patients must have a urine test. Low protein diet / strict control of the underlying disease will help prevent CKD progressing to the stage of dialysis.

What are the treatments available for CKD?

Advanced CKD will need dialysis and kidney transplant. Unfortunately, they are expensive and complicated. Hence early detection and prevention are invaluable. (ALSO READ International Women’s Day 2018 and World Kidney Day 2018: Kidney Test at Just Rs. 8!).

How to avoid recurrence of CKD?

CKD is irreversible hence it does not get cured and cannot recur.

Is there any natural remedy or juice to treat CKD?

Reduce protein intake will help reduce worsening of CKD. Normal intake in vegetarians in India is approximately 0.6 gm per kg per day. It should reduce to 0.4 gm per kg per day. Juices are in fact to be avoided due to high potassium content.



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World Kidney Day 2018: Ek Chammach Kam Campaign to Launch on World Kidney Day to Limit Salt Intake



World Kidney Day will be celebrated on March 8 with an aim to raise awareness about kidney and its importance. Programs and events are organized around the world as part of the awareness campaigns. People are educated about the kidney disease, risk factors and preventive behaviors. The aim is to reduce the kidney disease frequency and health issues related to it. Every year, World Kidney Day has a theme and this year it is Kidney and Women’s Health. Chronic kidney disease or CKD is one of the common health issues, with around 195 million women affected by it across the world. CKD can lead to kidney failure and death. In India, 17.2 percent people from urban areas suffer from kidney disease.

This year, on World Kidney Day Dr. Bhupendra Gandhi’s Amar Gandhi Foundation (AGF) is initiating a campaign called Ek Chammach Kam  (One spoon less) to limit the intake of salt. Over 150 senior-most nephrologists from Mumbai are coming together to raise awareness about the negative effect of salt intake in kidney disease. They want to highlight the high salt consumption among Indians. Dr. Bhupendra Gandhi says, “Chronic kidney disease is a ‘SILENT KILLER’; it usually has no significant symptoms until it has reached later stages where a patient is not left with many choices of treatment.”The aim of the campaign is to make people aware of the kidney disease and encourage them to make positive lifestyle changes. The ‘ek chammach kam’ campaign will be run on the social media platforms of Amar Gandhi Foundation and Mumbai Kidney Foundation (MKF).

According to Dr. Umesh Khanna, Senior Nephrologist & Chairman of Mumbai Kidney Foundation, “Women in particular love eating ‘chatpata’ food, a craving that leads to excess salt consumption. They must observe and monitor the same, as well as ensure low salt consumption in their families.” Senior Nephrologist, Dr Bhavesh Vora says, “People who are diabetic, hypertensive, obese or have a heart condition have a higher risk of kidney disease. In the light of all the eye-opening facts stated hereby, spreading awareness about a regular checkup of kidney health for early detection of chronic kidney disease is a must!”

A free urine test and blood test have been organized by MKF and AGF on March 8 for early detection of the kidney disease. You can get tested at any branch of Suburban Diagnostics laboratory on the day.

Here are some data provided by the nephrologists:

As per the World Health Organization, the prevalence of chronic kidney disease is estimated to be 8 to 16 percent in adults above the age of 30 globally.

In India, 17.2 percent of people in urban areas are affected by the disease, according to a study published in the BMC Nephrology journal.

One of the major risk factors is diabetes and over 69 million Indians suffer from Type 2 diabetes mellitus. The numbers are expected to be 140 million by 2040.

Another risk factor is obesity and it affects over 135 million Indians.

In India, 60 percent of chronic kidney disease patients either suffers from high blood pressure or are diabetic.



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